दो अंकों से इंटर मेें पहली डिवीजन से पिछड़ा कनालीछीना का दिव्यांग किशन आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहता है, लेकिन गरीबी इस होनहार युवक की राह में रोड़ा बन रही है।
कोटली (ख्वाकोट) निवासी दिव्यांग किशन पोखरिया (19) पुत्र राम सिंह पोखरिया ने इस साल जीआईसी ख्वांकोट से 500 में से 298 अंकों के साथ इंटर की परीक्षा पास की। किशन को बचपन से ही काफी कम दिखाई देता था। उसके पिता किशन को डॉक्टरों के पास ले गए। चश्मे से नाममात्र दिखाई देने के सिवा कोई इलाज संभव नहीं था। स्वास्थ्य महकमे ने किशन को सौ फीसदी विकलांग मान लिया, लेकिन किशन ने हिम्मत नहीं हारी, परिजनों ने भी हौसला दिया। किशन ने हाईस्कूल पास कर इस बार इंटर की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ पास कर ली।
किशन बताता है कि उसे पढ़ने के लिए काफी जोर देना पड़ता है। गुरुजनों और परिवार के लोगों की मदद से वह इंटर की पढ़ाई पूरी कर पाए हैं। ये होनहार दिव्यांग किसी अच्छे इंस्टीट्यूट में आगे की पढ़ाई करना चाहता है। इसके लिए उन्हें किसी संस्थान अथवा सरकार की मदद की आवश्यकता है। किशन कहता है कि मदद मिले तो वह भी आगे पढ़कर अपने सपनों को हकीकत में बदल सकता है। किशन एक अच्छा शिक्षक बनकर विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देना चाहता है।
कनालीछीना विकासखंड में दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा का जिम्मा संभाल रहे कनालीछीना जीआईसी में कार्यरत शिक्षक अवधेश कुमार किशन को मेधावी बताते हुए कहते हैं कि एक साल पहले राष्ट्रीय दृष्टि संस्थान में उसके प्रवेश के लिए आवेदन किया था, जिसका उत्तर नहीं मिला। इस बार फिर से किशन की ओर से आवेदन भेजा जा रहा है।
राह हो सकती है आसान
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को दृष्टिहीन दिव्यांगों के लिए स्किल डेवपलमेंट की योजना तैयार करने के निर्देश देकर दिव्यांगों को उनके पैरों में खड़ा करने की मंशा जताई है। मुख्यमंत्री, सांसद, विधायकों अथवा किसी संस्थान और समाजसेवी की नजर यदि होनहार किशन पर पड़े तो उसकी आगे की पढ़ाई की राह आसान हो सकती है।