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आलू की बंपर पैदावार, मगर दाम बेदाम

Tue, 27 Jun 2017 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
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आलू की खुदाई करते किसान - फोटो : अमर उजाला
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ध्यानार्थ.........
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पहाड़ की प्रसिद्ध नगदी फसल आलू किसानों के लिए अर्थव्यवस्था का बड़ा जरिया होती है। लेकिन इस बार आलू की अच्छी पैदावार होने के बावजूद किसान मायूस है। अब तक के संकेतों के मुताबिक उत्पादन तो करीब 10 से 15 प्रतिशत ज्यादा हुआ है, लेकिन किसानों को आलू की वाजिब कीमत नहीं मिल पा रही है। उन्हें महज 400 रुपये से 900 रुपये प्रति क्विंटल मिल पा रही है। जो 2016 से 300 रुपये से 700 रुपये प्रति क्विंटल कम है।
     
करीब दो सप्ताह से किसान आलू की खुदाई करने लगे हैं। आलू की पैदावार अच्छी होने से उनके चेहरे खिल उठे थे। लेकिन अब दाम के बेदम होने से किसानों की चिंता की लकीर बढ़ने लगी है। चंपावत के आसपास के गांवों के किसानों का कहना है कि आलू के उत्पादन में पिछले वर्ष की अपेक्षा करीब 15 प्रतिशत अधिक पैदावार नजर आ रही है। लेकिन शुरुआती तीन दिनों के बाद आलू के दाम गिर गए। किसानों को अच्छे आलू की कीमत 900 रुपये कुंतल मिल रही है। छोटे आलू का दाम बस 400 रुपये से अधिक नहीं है। किसानों का कहना है कि पिछले साल आलू की कीमत 1600 रुपये कुंतल तक थी। और तो और छोटे आलू का दाम भी 700 रुपये का था।      
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इधर थोक व्यापारी प्रदीप वर्मा व जनार्दन फुलारा का कहना है कि यहां के आलू लखीमपुर, बरेली, पीलीभीत, खटीमा की मंडियों में दाम नहीं मिल पा रहा है। जिससे वे अधिक कीमत पर आलू खरीदने की स्थिति में नहीं है। और अब कई थोक व्यापारियों ने तो आलू खरीदना या तो बंद कर दिया है या कम कर दिया है। उनका कहना है कि इस वक्त मैदानी क्षेत्र में पर्याप्त लोकल आलू उपलब्ध होने से दाम नहीं मिल पा रहा है। आलू की कीमत पिछले साल से 400 से 500 रुपये कुंतल तक गिर गई है। यहां किसानों को छोटे आकार के आलू की कीमत महज 400 रुपये कुंतल मिल रही है।      
   
चंपावत के आसपास के गांव चैकुनीबोरा, खर्ककार्की, नौलटाक, मुड़ियानी आदि गांवों के काश्तकारों की अच्छी पैदावार की खुशी जल्द ही काफूर हो गई। किसान महेश सिंह, नवीन, सुंदर सिंह, भवान आदि ने 7 कट्टे से 12 कट्टे बीज लगाकर आलू की खेती की। और उनकी पैदावार पिछले साल की अपेक्षा 15 प्रतिशत ज्यादा हुई। एक कट्टे बीज में करीब 9 कट्टे आलू की पैदावार हुई है। लेकिन बाजार में आलू की कीमत के लिए पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। इन काश्तकारों का कहना है कि विपणन की कोई व्यवस्था नहीं होने से वे ठगे महसूस कर रहे हैं। इस बार उन्हें छोटे आकार के आलू के महज 400 रुपये कुंतल मिल रहे हैं। जबकि बड़े साइज के आलू की कीमत 900 रुपये से अधिक नहीं मिल पा रही है। इससे उनकी लागत आने भी मुश्किल हो जाएगा। किसानों ने यहां के कोल्ड स्टोर को संयंत्र लगाकर चालू कराने की भी मांग की है।
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अभी आलू की खुदाई चल रही है। ये काम अगले 15 दिनों में पूरा होगा। लेकिन अब तक मिल रहे संकेतों से लग रहा है कि इस बार आलू की बेहतर पैदावार हुई है। विभाग विपणन की व्यवस्था नहीं करता।
एनके आर्य,
जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।
  
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