पिथौरागढ़ में प्रदर्शन करती आशा कार्यकत्रियां।
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आशा कार्यकर्ताओं ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुरूप न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये देने समेत कई मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय में शासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के बानर तले सड़क में उतरी आशा कार्यकर्ताओं ने मांगों को लेकर नारेबाजी की। मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा कि आशा स्वास्थ्य विभाग के सभी कार्यक्रमों की रीढ़ बन चुकी हैं। उन पर लगातार काम का बोझ डाला जा रहा है। लेकिन वेतन और मानदेय के नाम पर शासन की ओर से पल्ला झाड़ दिया जाता है। कहा कि कोई आशा यदि कार्य के दौरान दुर्घटना का शिकार हो जाती है, या उसकी मृत्यु हो जाती है तो उसे एक पैसे का भी मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है।
उन्होंने राज्य सरकार पर भी वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य सरकार ने 2000 रुपये मानदेय, प्रोत्साहन राशि, बोनस देने समेत कई वायदे किए थे। लेकिन इन पर अमल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुरूप न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये देने, पूर्व में घोषित वार्षिक प्रोत्साहन राशि 5000 रुपये एरियर के साथ तत्काल देने समेत कई मांगें उठाई। कहा कि आशाओं का बीमा कराने के साथ ही दुर्घटना का शिकार होने पर मानदेय दिया जाए। मांगें पूरी नहीं होती हैं तो यूनियन आंदोलन छेड़ देगी। प्रदर्शन में यूनियन की जिलाध्यक्ष इंद्रा देउपा, जिला महामंत्री निर्मला पाल, लीला जोशी, पिंकी, दीपा तिवारी, ज्योति पुनेठा, निर्मला तिवारी, राधा बसेड़ा, पुष्पा देवी, सुनीता मनौला, बसंती पांडेय, हेमा बिष्ट, आशा देवी, कमला देवी, रेखा मेहता शामिल थीं।