गोल्फा जाने वाले रास्ते में जिंबागाड़ नाले में टूटा हुआ पुल।
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सेराघाट से गोल्फा गांव जाने वाले पैदल रास्ते पर पड़ने वाले जिंबागाड़ नाले में बने पैदल पुल की मरम्मत चार माह बाद भी नहीं हो पाई है। इसके अलावा इस पैदल रास्ते का 200 मीटर हिस्सा भी बारिश के समय बह गया था। जिसे अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है। पुल क्षतिग्रस्त होने और पैदल रास्ता ठीक न होने से गोल्फा गांव के लिए राशन तथा अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। सारा सामान मोतीघाट में रखा हुआ है।
गोल्फा गांव में इस सीजन में पैदा होने वाला करीब 800 क्विंटल आलू और 500 क्विंटल राजमा गांव से बाहर नहीं निकल पा रहा है। इससे यहां के लोग इस बार गंभीर संकट में आ गए हैं। जिंबागाड़ में पहले पक्का पैदल पुल था लेकिन 2013 की आपदा में पक्का पुल बह गया था। उसके बाद हर साल बारिश बंद होने के बाद लोक निर्माण विभाग सितंबर में इस नाले में अस्थायी पैदल पुल का निर्माण करता था लेकिन इस बार पुल का निर्माण नहीं हो पाया। पिछले साल बनाया गया अस्थायी पुल जून में भारी बारिश के दौरान नाले की तरफ बह गया था।
गोल्फा गांव के लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत आलू और राजमा उत्पादन है। यदि यह फसल समय पर बाजार तक नहीं पहुंची तो किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ता है। इस बार गांव के लोग इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सिंह कोरंगा ने बताया कि जिलाधिकारी से एक बार इलाके का दौरा करने का आग्रह किया गया है ताकि वह समस्या को खुद देख सकें। इधर गांव के लोगों के बार बार आग्रह के बाद रास्ते की दशा देखने के लिए लोनिवि के अवर अभियंता महेंद्र वर्मा ने राजस्व उपनिरीक्षक तथा खाद्य निरीक्षक के साथ दौरा किया। अवर अभियंता ने गांव के लोगों को बताया कि शासन ने क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत के लिए धन नहीं दिया है। इस कारण इसमें काम नहीं हो पा रहा है। लोनिवि के मजदूरों को रास्ते की मरम्मत के लिए लगाया गया है लेकिन उनके पास सड़क की मरम्मत करने वाले उपकरणों की भारी कमी है। इन हालातों में पैदल रास्ते और पुल की मरम्मत कब तक होगी कहा नहीं जा सकता। यदि इस बार गोल्फा गांव से आलू और राजमा बाजार तक नहीं पहुंचा तो काश्तकारों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।