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घाट में मित्र पुलिस ने लगाया संवेदनहीनता का ‘बैरियर’

Sat, 25 May 2019 10:37 PM IST
kamlesh kamlesh ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
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घाट बैरियर खुलने के इंतजार में घायल बेटे को कंधे का सहारा देकर खड़ा बूढ़ा पिता। - फोटो : पिथौरागढ़
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 घाट चौकी पुलिस ने रात ढाई बजे गंगोलीहाट से घायल मरीज को लेकर पिथौरागढ़ आ रही एंबुलेंस के लिए बैरियर नहीं खोला। नींद में गर्क पुलिस कमी एंबुलेंस का हूटर बजने के आधे घंटे बाद भी बैरियर खोलने बाहर नहीं आए। चौकी का गेट खटखटाने पर एक कुत्ता काटने को आया। इस बीच पिथौरागढ़ से पहुंची दूसरी एंबुलेंस में शिफ्ट करने के लिए घायल बेटे को आधे घंटे तक बूढ़ा पिता कंधे का सहारा देकर खड़ा रहा। अब पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक ने जांच के निर्देश दे दिए हैं।
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शुक्रवार रात को गंगोलीहाट निवासी नारायण सिंह पहाड़ी से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। गंगोलीहाट सीएचसी में उसका प्राथमिक उपचार करने के बाद 108 एंबुलेंस से उसे हायर सेंटर रेफर किया गया। एंबुलेंस घायल को लेकर रात दो बजे घाट पुलिस चौकी पर पहुंची। चौकी का गेट खोलने के लिए हूटर बजाया लेकिन कोई पुलिस कर्मी गेट खोलने नहीं आया।

इस दौरान पिथौरागढ़ से घायल को ले जाने आई एंबुलेंस भी बैरियर के पास पहुंच गई। दूसरी एंबुलेंस में शिफ्ट करने के लिए बैरियर खुलने के इंतजार में घायल का बूढ़ा पिता बेटे को कंधे का सहारा देकर खड़ा रहा। देरी होते देख जब 108 कर्मी बैरियर खटखटाने लगे तो वहां बंधा एक कुत्ता काटने को आया। बमुश्किल चौकी में पहुंचकर जब 108 कर्मियों ने वीडीओ बनानी शुरू की तो ड्यूटी में तैनात पुलिस कर्मी चाबी खोजने लगा। चाबी खोजने में भी पुलिस कर्मी को काफी समय लगा। बैरियर खुलने का इंतजार किए बिना घायल युवक को बमुश्किल बैरियर के नीचे से निकालकर दूसरी एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया। 108 के डीपीओ ने सीएम हेल्प लाइन में भी इस मामले की शिकायत की है।
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एसपी ने सीओ को सौंपी जांच
- घायल मरीज को ले जा रही एंबुलेंस के लिए समय पर बैरियर न खोलना गंभीर विषय है। पुलिस क्षेत्राधिकारी को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
- रामचंद्र राजगुरु, पुलिस अधीक्षक, पिथौरागढ़।

समय से बैरियर न खुलने पर गंभीर रोगियों का रिस्क बढ़ेगा
चंपावत और अल्मोड़ा के धौलादेवी से भी मरीजों को रेफर किया जाता है। अल्मोड़ा की एंबुुलेंस मकड़ाऊ तक ही आती है। ऐसे ही बैरियर नहीं खोला गया तो गर्भवती या हार्ट के मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है।
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- परमानंद पंत, जिला कार्यक्रम अधिकारी 108 सेवा।
 
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