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खुले में फेंक दिया लाखों रुपये का एक्सपायरी कीटनाशक

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बलुवाकोट में खुले में फैंका गया कीटनाशक। अमर उजाला - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। केंद्र सरकार किसानों की आय को वर्ष 2022 तक दो गुना करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। कृषि महकमे की लापरवाही इस योजना पर पलीता लगा रही है। हाल यह है कि फसलों को रोगों से बचाने के लिए आया कीटनाशक गोदामों में ही डंप हो रहा है। एक्सपायर (कालातीत) होने पर इसे खुले में फेंक दिया जा रहा है। बलुवाकोट न्याय पंचायत में ऐसा मामला सामने आया है।
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कृषि विभाग जिले के सात ब्लॉकों के लिए प्रतिवर्ष 16 लाख रुपये के कीटनाशक खरीदता है। इनमें मुनस्यारी ब्लॉक शामिल नहीं है। न्याय पंचायत वार किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर कीटनाशक उपलब्ध कराए जाते हैं। शिविरों के माध्यम से भी कृषि संबंधी योजनाएं, कीटनाशक और संयंत्र किसानों को मुहैया कराए जाते हैं। बलुवाकोट न्याय पंचायत में काफी समय से ये कीटनाशक किसानों को उपलब्ध नहीं कराए गए। कीटनाशकों को गोदाम में ही डंप कर दिया गया। भंडार प्रभारी के निधन के बाद जब गोदाम खोला गया तो करीब तीन लाख रुपये मूल्य के कीटनाशक एक्सपायर हो चुके थे।
गोदाम खाली करने के लिए इन कीटनाशकों को बलुवाकोट में श्मशान घाट जाने वाले रास्ते पर फेंक दिया गया। खुले में फेंके गए जहरीले रसायनों से इंसानों के साथ ही जानवर और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचने की आशंका हैं। न्याय पंचायत प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि पूर्व का कीटनाशक है जिसकी एक्सपायरी तिथि समाप्त हो गई है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र बिष्ट ने बताया कि कीटनाशक आयुर्वेदिक अस्पताल और स्वास्थ्य उपकेंद्र के पास खुले में फेंके गए हैं। इन कीटनाशकों का जहरीला रसायन नदी में मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कीटनाशकों से तीखी दुर्गंध उठ रही है जो इंसान और जानवरों के लिए भी घातक हैं। उन्होंने न्याय पंचायत प्रभारी से मुलाकात कर खुले में फेंके गए कीटनाशकों को शीघ्र गड्ढे में दबाए जाने का अनुरोध किया।
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भंडार प्रभारी लंबे समय से बीमार थे। इसके चलते कीटनाशक बंटने के लिए न्याय पंचायतों में नहीं पहुंच पाया। एक्सपायरी कीटनाशक बेच नहीं सकते उन्हें गड्ढे में दबाने के निर्देश दिए गए हैं। कीटनाशकों की कीमत कर्मचारी के फंड से वसूली जाएगी।- अमरेंद्र चौधरी, मुख्य कृषि अधिकारी, पिथौरागढ़।
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