रामलीला प्रबंधकारिणी समिति के नेतृत्व में पिथौरागढ़ में बसंतोत्सव और कुमाऊंनी रामलीला शुरु हो गई है। कुमाऊंनी रामलीला में पहले दिन रामजन्म से लेकर परशुराम-लक्ष्मण संवाद तक का मंचन किया गया।
रामलीला की शुरुआत रामजन्म से हुई। रामजन्म के समय ‘ है ग्योछ आज अयोध्या में विष्णु अवतार’ गीत गाया गया। ताड़का, सुबाहु वध के बाद धनुष यज्ञ का मंचन हुआ। जब तमाम राजा शिवधनुष में प्रत्यंचा नहीं चढ़ा पाए तो राजा जनक कुपित होकर कह उठते हैं ‘मेरी चेली सिया आज अबेवा रै गेछ, धरती वीरों है खाली है गेछ’। इस पर नाराज होकर लक्ष्मण कह उठते हैं ‘शिव की धनुली मैं तोड़ुलो भाई रे’। महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम शिव धनुष में प्रत्यंचा चढ़ाते हैं, शिव धनुष टूट जाता है। इसके पश्चात लक्ष्मण और परशुराम में संवाद होता है।
बसंतोत्सव में राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल मंडप, सोरवैली पब्लिक स्कूल, विवेकानंद इंटर कालेज, स्वरांजली नृत्य वाटिका के दल ने बेहतरीन कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विवेकानंद इंटर कालेज के दल द्वारा प्रस्तुत छलिया नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। बसंतोत्सव और कुमाऊंनी रामलीला का उद्घाटन रामलीला प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह माहरा ने किया। समिति के सचिव दीपक गुप्ता ने कहा कि कुमाऊंनी संस्कृति के संरक्षण के लिए यह आयोजन किया गया है।