पिथौरागढ़/चंपावत। 12 सूत्री मांगों के लिए आशा कार्यकर्ताओं ने जिले भर में कार्य बहिष्कार जारी रखा। उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। मांग पूरी न होने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
मंगलवार को डीडीहाट में आशा कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष इंद्रा देउपा के नेतृत्व तहसील तिराहे में एकत्र हुए। उन्होंने यहां सरकार के खिलाफ नारे लगाकर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वह लंबे समय से 12 सूत्री मांगों के लिए आंदोलन कर रही हैं। उनकी मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। इस मौके पर देवकी जोशी, ममता कन्याल, नंदी चौहान, कमला देवी, विद्या उपाध्याय, पुष्पा देवी, राधा बसेड़ा, गंगा देवी, चंपा देवी, विमला देवी, रंजना डांगा, नारायणी चंद, कमला पंचपाल, दीपा मनौला, रेखा देवी, पार्वती खड़ायत, दीपा पंत, जानकी खोलिया आदि मौजूद रहीं।
चंपावत जिले में भी आशा कार्यकर्ताओं का कार्य बहिष्कार दूसरे दिन भी जारी रहा। मंगलवार को विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने आशाओं के आंदोलन का समर्थन किया। चंपावत कलक्ट्रेट में प्रमिला जोशी, सीता चौधरी, नीलू महर, हेमा जोशी, सुनीता रावत, तनूजा पांडेय, माधवी बरदोला आदि ने विभिन्न मांगों को लेकर दिन भर धरना दिया। पूर्व जिला पंचायत सदस्य गोविंद सिंह सामंत और राजेंद्र पुनेठा आदि ने आशाओं के आंदोलन का समर्थन करते हुए उनके साथ धरने में शिरकत की। लोहाघाट में मंगलवार को यूनियन की जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा के नेतृत्व में आशाओं ने तहसील परिसर में कार्य बहिष्कार कर धरना प्रदर्शन किया। राज्य आंदोलनकारी हिमेश कलखुड़िया और सामाजिक कार्यकर्ता सतीश चंद्र पांडेय आदि ने समर्थन दिया। धरना देने वालों में ब्लाक अध्यक्ष रीता सिंह, पदमा प्रथोली, रेखा पुजारी, चंपा राय, रीना सिंह, कौशल्या पांडेय, हेमा जोशी शामिल थी। टनकपुर में भी आशाओं ने संयुक्त चिकित्सालय परिसर में धरना दिया। लीला ठाकुर व मीरा कश्यप के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में सीता, माया चौहान, प्रोमिला सिंह, बबीता, हीरा बोहरा, कमला चंद, शकुंतला भंडारी, अनीता, मीना चंद आदि शामिल थीं।
ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं के लड़खड़ाने के आसार
पिथौरागढ़। आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं के लड़खड़ाने के आसार पैदा हो गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और शिशुओं में टीकाकरण से लेकर सुरक्षित प्रसव में आशाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। हड़ताल के कारण अब आशाओं ने गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने का काम बंद कर दिया है। गांवों में आशाएं कोरोना से बचाव की जानकारी देने के अलावा लोगों को टीका लगाने के लिए प्रेरित कर रहीं थीं। अब इस पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। बुधवार को होने वाला बच्चों का टीकाकरण का काम भी प्रभावित होगा।
ये हैं आशा कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें
-आशा कार्यकताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम 21 हजार रुपये का मानदेय दें।
-जब तक मानदेय और कर्मचारियों का दर्जा मिलने तक अन्य विभागों से योजनाओं में लगे कार्मिकों की तरह मानदेय दें।
-सेवानिवृत्त होने पर पेंशन की सुविधा दें।
-कोविड कार्यों में लगी आशा कार्यकताओं को दस हजार रुपये मासिक भत्ता, 50 लाख रुपये का बीमा और दस लाख का स्वास्थ्य बीमा दें।
-कोविड ड्यूटी के दौरान मृत आशा कर्मियों के आश्रितों को 50 लाख का बीमा और चार लाख का अनुग्रह राशि दें।
-सेवा के दौरान दुर्घटना या किसी तरह बीमारी होने पर सुरक्षा के लिए नियम बनाए और न्यूनतम दस लाख रुपये का मुआवजा दें।
-देय मासिक राशि और सभी मदों का समय से भुगतान करें।
-आशाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें।
- सभी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति करें।