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ख्वांकोट में पॉजिटिवों की सुध लेने दोबारा नहीं पहुंचा स्वास्थ्य विभाग

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कनालीछीना(पिथौरागढ़)। ख्वांकोट ग्राम पंचायत में 44 लोगों को 15 मई को होम आइसोलेट करने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पलट कर नहीं देखा है। गांव के कई संक्रमित लोग खेतों में काम में जुटे हैं तो कुछ नौले-धारों से घरों के लिए पानी ला रहे हैं। इससे संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ गया है।
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ख्वांकोट में 15 मई को 44 लोग एक साथ पॉजिटिव आए थे। स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बनाकर संक्रमितों को जरूरी दवा वितरित की। मगर फिर दोबारा मुड़कर नहीं देखा। अमर उजाला ने कंटेनमेंट जोन का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। 18 किमी का सफर तय कर गांव पहुंचने पर पता चला कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रधान पप्पू पोखरिया के कहने पर एक बार आकर सिर्फ 96 लोगों की मई के पहले सप्ताह में सैंपलिंग की थी। जब गांव में मुंबई से कुछ लोग आए थे। जबकि गांव की आबादी 300 है। इसके अलावा ग्राम से लगे दो अन्य गांव हैं। 15 मई को लोगों के संक्रमित आने के बाद से अभी तक कोई सैंपलिंग नहीं की गई। लोगों को अभी भी स्वास्थ्य विभाग की टीम का इंतजार है। संक्रमण का खतरा क्षेत्र में अभी भी बरकरार है। क्षेत्र में अधिकांश लोग सर्दी, जुखाम और बुखार से पीड़ित हैं। लोग लगातार स्वास्थ्य विभाग से सैंपलिंग की मांग कर रहे हैं। मगर अभी तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली है।
पिछले माह हुई पांच शादियां
कनालीछीना(पिथौरागढ़)। लोगों ने बताया कि पिछले माह गांव में पांच शादियां हुई थी। यहां से बरात हल्द्वानी, टनकपुर, खटीमा, पिथौरागढ़ गई थीं। जबकि एक मई को एक दर्जन से अधिक लोग मुंबई और अन्य जिले से गांव पहुंचे थे। इनकी जांच हुई या नहीं इसे लेकर भी कोई जानकारी नहीं है। प्रधान पप्पू पोखरिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम को इसकी जानकारी दी। मगर स्वास्थ्य विभाग की टीम तीन दिन बाद क्षेत्र में आई और सिर्फ 96 लोगों के सैंपल जांच को लिए। (संवाद)
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खुद का ऑक्सीमीटर खरीदकर नाप रहे ऑक्सीजन लेवल
कनालीछीना(पिथौरागढ़)। स्वास्थ्य विभाग से संक्रमितों को ऑक्सीमीटर भी नहीं मिला है। जिसके बाद लोगों ने पिथौरागढ़ से 1500 रुपये का ऑक्सीमीटर खरीदकर अपना ऑक्सीजन लेवल नापना शुरू कर दिया है। उन्हें स्वास्थ्य विभाग पर अब भरोसा नहीं है। क्षेत्र में कंटेनमेंट जोन का बनाया बोर्ड भी अब जमीन में कहीं पड़ा है। (संवाद)
संक्रमित लोग नियमों का नहीं कर रहे पालन
कनानीछीना(पिथौरागढ़)। माइक्रो कंटेनमेंट जोन ख्वांकोट में संक्रमित नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। संक्रमित खेतों में काम में जुटे हैं। इससे लोगों में डर का माहौल अधिक है। सार्वजनिक जगहों पर पानी भरने पहुंच रहे हैं। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि अधिकांश लोगों ने खुद को घरों में कैद कर रखा है। (संवाद)
चार व्यापारी, वाहन चालक पॉजिटिव
कनालीछीना(पिथौरागढ़)। क्षेत्र में पांच राशन की दुकानें हैं। जिसमें से चार लोग कोरोना संक्रमित हैं। मात्र एक दुकान के भरोसे लोग बैठे हैं। इन सभी दुकानों में लोगों का आना जाना अधिक रहता है। वहीं क्षेत्र के तीन टैक्सी संचालकों में से दो कोरोना संक्रमित हैं। फिलहाल गांव में राशन या किसी चीज की कमी नहीं है। (संवाद)
तल्ला चर्मा के नाम से जाना जाता है क्षेत्र
कनालीछीना(पिथौरागढ़)। क्षेत्र तल्ला चर्मा के नाम से जाना जाता है, जो चर्मा नदी के किनारे स्थित है। इस क्षेत्र में ख्वांकोट, महर गांव, कोटली ग्रामसभाएं हैं। इनकी कुल आबादी एक हजार है। पूरे क्षेत्र का ख्वांकोट मुख्य बाजार है। (संवाद)
चिकित्सालय में कोई डॉक्टर नहीं
कनालीछीना(पिथौरागढ़)। ख्वांकोट क्षेत्र के एलोपैथिक चिकित्सालय में एक साल से डॉक्टर नहीं है। फार्मासिस्ट भी माह में एक- दो बार ही आता है। वार्ड ब्वॉय के भरोसे एक हजार की आबादी है। चिकित्सालय का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। मंजू देवी ने कहा कि यहां पर डॉक्टर की तैनाती की जाए। (संवाद)
पानी और सड़क की समस्या से दिक्कत
कनालीछीना(पिथौरागढ़)। साता-ख्वांकोट पेयजल योजना से लोगों को मात्र दो घंटे ही पानी मिल पाता है। स्रोतों की कमी के चलते लोगों का पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। लोगों ने गांव के लिए पेयजल योजना बनाने की मांग की है। 10 वर्ष पूर्व स्वीकृत 18 किमी बगना-ख्वांकोट सड़क मात्र दो किमी तक ही कटिंग हो पाई है। सड़क की हालात बेहद खराब है। वाहन जाने में दिक्कत पेश आती है। बारिश में सड़क अक्सर बंद होने से लोगों को पैदल ही आवागमन करना पड़ता है।(संवाद)
लोगों की जांच रिपोर्ट नहीं आई
कनालीछीना(पिथौरागढ़)। सिमार गांव के लोगों चार मई को कोरोना जांच को सैंपल लिए थे। स्वास्थ्य विभाग ने 78 लोगों के सैंपल लिए थे। सिरोली गांव के प्रधान मनोज सिरोला ने बताया कि 14 दिन बाद रिपोर्ट नहीं आई है। निगेटिव रिपोर्ट है तो भी स्वास्थ्य विभाग को बताना चाहिए। (संवाद)
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कोट..........
स्वास्थ्य विभाग को क्षेत्र में आकर लोगों का हाल जानना चाहिए। एक बार दवा और मास्क देकर विभाग ने इतिश्री कर दी है।
पप्पू पोखरिया, प्रधान, संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग को क्षेत्र में सैनिटाइजेशन का कार्य कराना चाहिए। विभाग के रवैये के बाद खुद ही सैनिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है।
हरीश पोखरिया, क्षेत्र पंचायत सदस्य
संक्रमण का खतरा गांव में बरकरार है। एलोपैथी चिकित्सालय में अगर डॉक्टर होता तो लोगों को दिक्कत नहीं होती।
बिमला देवी, ग्रामीण
गांव में अधिकांश लोग घरों में कैद हैं। एक साथ इतने संक्रमित मिलने के बाद क्षेत्र में डर का माहौल बना हुआ है।
दीवान सिंह,ग्रामीण
स्वास्थ्य विभाग को क्षेत्र में आकर तीनों ग्रामों के लोगों की सैंपलिंग करनी चाहिए। इतनी बड़ी आबादी में कोई भी संक्रमित हो सकता है।
शंकर सिंह, ग्रामीण
संक्रमित लोगों को नियमों का पूरा पालन करना चाहिए। आइसोलेशन पूरा होने के बाद उन्हें घर से बाहर निकलना चाहिए।
पंकज सिंह, ग्रामीण
मुंबई से आए लोगों की सैंपलिंग के बाद विभाग दोबारा नहीं आया। विभाग को गांव में आकर सैंपलिंग बढ़ानी चाहिए।
खीम सिंह, ग्रामीण
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