नैनीपातल में सड़क में फेंका गया कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
एक लाख आबादी वाले पिथौरागढ़ शहर का कूड़ा नैनीपातल क्षेत्र के कई गांवों के लिए जी का जंजाल बन गया है। नैनीपातल में बनाए गए कूड़ा निस्तारण स्थल की गंदगी से आसपास का वातावरण प्रदूषित हो रहा है। गांवों के पेयजल स्रोत दूषित हो गए हैं। अब तो नगरपालिका के कर्मचारियोें ने सड़क पर ही कूड़ा डालना शुरू कर दिया है, इससे गुस्साए लोगों ने कूड़ा निस्तारण स्थल नैनीपातल से हटाने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का एलान किया है।
पिथौरागढ़ शहर से रोज निकलने वाले करीब 20 टन कूड़े को पिथौरागढ़-धारचूला एनएच किनारे नैनीपातल में फेंका जाता है। हालांकि, लोग यहां से कूड़ास्थल हटाने की मांग कर चुके हैं, बावजूद इसके दशकों से नैनीपातल में ही कूड़ा डाला जा रहा है। कूड़े के कारण इस क्षेत्र में हमेशा दुर्गंध उठती है। इन दिनों सड़क पर ही कूड़ा फेंक दिया जा रहा है।
ग्रामीण बाला दत्त कापड़ी, प्रवीन चंद, भुवन राम, जगत चंद, लच्छी चंद का कहना है कि कूड़े के कारण नाघर, पीपुल, भोलागांव, मझेड़ा, दौली और चामा गांवों के पेयजल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं। कूड़ा निस्तारण के लिए पालिका ट्रीटमेंट प्लान नहीं लगा पा रही है। कहा कि नैनीपातल से कूड़ा डंपिंग स्थल नहीं हटता है तो ग्रामीण उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेंगे।
कूड़ा बिखर गया होगा, सड़क पर नहीं फेंका जा रहा है। जैविक और अजैविक कूड़े को अलग-अलग करने के लिए नैनीपातल में चार पर्यावरण मित्रों की ड्यूटी लगाई है। जैविक प्लांट लगाने के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को गया था, जिस पर कुछ आपत्तियां लगी थी। आपत्तियों का निस्तारण कर दोबारा प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
-दीपक कुमार, प्रभारी अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका पिथौरागढ़