जिला मुख्यालय से सटे सेरा गांव से उल्लास और जयकारे के साथ उल्का देवी का डोला उठा। इससे पहले नवरात्र की अष्टमी और नवमी को रात में सेरा गांव में उल्का देवी के जागर गाथा लगी। रविवार दोपहर बाद गांव के सभी लोग डोले को सजाने और पूजा अर्चना के लिए जुट गए। शाम को करीब छह बजे डोला गांव से उल्का देवी मंदिर के लिए रवाना हुआ तो गांव के बच्चे, बूढे़ और महिलाएं डोले का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए नतमस्तक हो गए। लोगों का यह अटूट विश्वास है कि उल्का देवी रोग और संकटों का निवारण करती है। साथ ही देवी की कृपा से गांव में किसी प्रकार की आपदा भी नहीं आती।
डोला कालसिन मंदिर, गंगनाथ मंदिर तक घूमने के बाद उल्का देवी मंदिर में पहुंचा। डोले की पूरे मंदिर परिसर की परिक्रमा कराई गई। डोले पर हर साल की तरह इस बार भी देवडांगर कवींद्र मेहता ही बैठे। आयोजन में लाल सिंह मेहता, गजेंद्र सिंह मेहता, होशियार सिंह मेहता, राजेंद्र सिंह मेहता, नरेंद्र सिंह मेहता, सुरेंद्र सिंह मेहता के अलावा नगरपालिका अध्यक्ष जगत सिंह खाती, कांग्रेस नेता खीमराज जोशी समेत तमाम लोग शामिल हुए।