बेड़ीनाग तहसील की 50 हजार आबादी को स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए खोले गए अस्पताल का संचालन इस समय एकमात्र आयुर्वेदिक संविदा डॉक्टर कर रहा है। सरकार पहाड़ के अस्पतालों की सेहत सुधारने की बात तो करती है, लेकिन यह खुद सोचा जा सकता है कि एक डॉक्टर कैसे व्यवस्था को संभाल पाएगा। अस्पताल में पहले जिन डॉक्टरों की तैनाती हुई थी वह पीजी कोर्स करने चले गए हैं। उन्होंने अस्पताल में सेवाएं देना बंद कर दिया है।
अब अस्पताल में यह स्थिति आ गई है कि गंभीर रोगियों और प्रसव पीड़िताओं को तत्काल रेफर करने के अलावा कोई चारा नहीं है। अस्पताल में सामान्य मरीजों को भी चिकित्सा की सुविधा नहीं मिल पाती। एक डॉक्टर इतने ज्यादा मरीजों को नहीं देख पाता है। स्थानीय लोग कई बार डॉक्टरों के रिक्त पद भरने की मांग उठा चुके हैं, लेकिन सरकार और स्वास्थ्य विभाग कोई गौर नहीं करता।
भाजयुमो नेता मनीष पंत ने कहा कि सरकार बिना आंदोलन किए यहां की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की पहल करने वाली नहीं है। उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. यूएस अधिकारी ने बताया कि जिले के लगभग सभी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी चल रही है, यदि शासन नए डॉक्टरों की तैनाती करता है तो बेड़ीनाग को वरीयता में डॉक्टर उपलब्ध कराए जाएंगे।