जल निगम की लापरवाही के चलते शुभारंभ के 11 दिन बाद भी नवनिर्मित आंवलाघाट योजना से पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं हो पाई है। एक ओर हजारों लोग पेयजल की कमी के चलते प्यासे हैं, वहीं नवनिर्मित आंवलाघाट योजना का पानी नालियों में बर्बाद हो रहा है। लाइनों में जंग से गंदा पानी आने के बाद जल संस्थान ने आपूर्ति से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
मंगलवार को 11वें दिन भी आंवलाघाट से नगर में पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई। आंवलाघाट से पंपिंग के बाद मोस्टामानू का पांच एमएलडी क्षमता वाला टैंक भरा रहा, लेकिन पर्याप्त पानी होने के बाद भी क्षेत्रवासियों को आपूर्ति नहीं की गई। नवनिर्मित योजना की लाइनों में जंग के कारण जल संस्थान ने आंवलाघाट का पानी नहीं बांटा। नतीजतन आंवलाघाट योजना का पानी दिनभर नालियों में बहता रहा। जल निगम की पेयजल लाइनों का पानी लोनिवि टैंक के साथ ही हनुमान मंदिर, सिल्थाम में नालियों में बहाया गया।
दूसरी ओर नगरवासी पेयजल समस्या से जूझते रहे। नगर के खड़कोट, घंटाकरण, सेरा, बैंक रोड़, डिग्री कॉलेज, पांडेगांव, जगदंबा कॉलोनी, सरस्वती विहार आदि क्षेत्रों में पानी की समस्या गहराई रही। इन क्षेत्रों में जल संस्थान दिन में एक बार भी पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं कर सका। लोगों को नौलों, धरों और हैंडपंपों से पानी ढोना पड़ा। जल संस्थान के ईई विशाल कुुमार ने बताया कि लाइनों की गंदगी के चलते आंवलाघाट का पानी नहीं बांटा। पानी साफ होने पर आपूर्ति सुचारु की जाएगी। जल निगम के ईई आरएस धर्मशक्तू का कहना है कि लाइनों की सफाई का काम चल रहा है। जल्द ही जंग की समस्या दूर हो जाएगी।
गौरीहाट में पानी संकट से जूझ रहे लोग
झूलाघाट। गौरीहाट, लमतड़ा, भंडाखोली, असरानी, सुरमोड़ा और गौरीहाट बाजार में भीषण जल संकट बना है। मड़मानले से गौरीहाट के लिए 1978 में बनी 36 किमी लंबी ढोलखोली पेयजल योजना 7 अप्रैल को क्षतिग्रस्त हो गई थी। योजना क्षतिग्रस्त होने की सूचना जल संस्थान को 9 अप्रैल को दी गई थी। अगले दिन विभाग ने योजना की मरम्मत की, लेकिन एक दिन पानी चलने के बाद योजना फिर से क्षतिग्रस्त हो गई। लोगों को 5 किमी दूर से पानी ढोना पड़ रहा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता विशाल कुमार का कहना है कि पेयजल योजना की मरम्मत का काम चल रहा है। वाहन से पानी बंटवाया जा रहा है। बुधवार शाम तक पानी की सप्लाई शुरू हो जाएगी।