मुनस्यारी/मदकोट/बंगापानी। मुनस्यारी के आपदा प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में लोग डरे हुए हैं। टांगा, गैला, लोधी, धापा और जोशा गांवों में बारिश से काफी नुकसान हुआ है। ज्यादातर लोग जंगलों में बनाए गए टेंटों में रह रहे हैं। स्कूल भवनों में शिफ्ट किए गए टांगा गांव के लोगों के लिए शौचालय और स्नानागार बनाने का काम तेजी से चल रहा है। शनिवार को भू-वैज्ञानिकों की टीम ने आपदा प्रभावित गांवों में जाकर सर्वेक्षण किया।
इन गांवों में 18 और 19 जुलाई की रात को आई आपदा ने भारी नुकसान पहुंचाया है। गोरी नदी और धपुवागाड़ के उफान पर आने से खसियाबाड़ा के ग्रामीणों की 25-30 नाली जमीन बह गई है। अब मकानों के लिए खतरा बना हुआ है। कई मकानों में दरारें पड़ी हैं। ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की मांग की है। आपदा से हुई क्षति का सर्वेक्षण करने के लिए भू-वैज्ञानिकों की टीम भी क्षेत्र में पहुंच गई है। शनिवार को तल्ला गैला में पिथौरागढ़ के भू-वैज्ञानिक सहित टीम के सदस्यों ने जमीन का सर्वेक्षण कर रिपोर्ट तैयार की। टीम के सदस्य अन्य सभी गांवों में जाकर सर्वेक्षण करेंगे।
टांगा के सभी प्रभावित परिवार सेरा हाईस्कूल और प्राथमिक स्कूल भवनों में रह रहे हैं। इन परिवारों के लिए शौचालय और स्नानागार बनाने के लिए तेजी से काम हो रहा है। इस समय केवल एक ही शौचालय है। रविवार तक शौचालय और स्नानागार बनकर तैयार हो जाएगा। इसी गांव के लोधी तोक निवासी परिवार भी जंगल में शरण लिए हुए हैं। इस गांव के ऊपर से भूस्खलन होने और दरार पड़ने के कारण सभी ग्रामीण डरे हुए हैं। इन लोगों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। उधर 18 जुलाई की रात अतिवृष्टि से खतरे में आए धापा गांव के लोग टेंटों में ही रह रहे हैं। सड़क न होने से स्थानीय लोगों के साथ ही मिलम के लिए जाने वाले आईटीबीपी जवानों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सभा सदस्य प्रदीप टम्टा और क्षेत्रीय विधायक हरीश धामी ने भी शनिवार को आपदा प्रभावित गांवों का दौरा कर प्रभावितों का हाल जाना। मुनस्यारी के बलौंटा गांव में समस्याएं सुनते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास को लेकर हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
बेघर हुए ग्रामीण खांसी जुकाम से पीड़ित
मदकोट। टांगा गांव में आई आपदा के कारण बेघर होने से कभी टेंटों में तो कभी सरकारी भवनों में रात गुजार रहे ग्रामीण खुजली, खांसी-जुकाम से पीड़ित हैं। एनएचपीसी धारचूला ने शनिवार को सेरा में चिकित्सा शिविर लगाकर पीड़ितों के स्वास्थ्य की जांच कर दवा बांटी। डॉ.नवीन और डॉ. दयानंद ने मरीजों की जांच की। फार्मेसिस्ट मोहन भाकुनी, प्रदीप और मनोज वर्मा ने दवा बांटी। शिविर में कुल 220 मरीजों की जांच की गई।
मल्ला जोहार विकास समिति ने दिए 2.10 रुपये
मुनस्यारी। धापा के आपदा प्रभावित परिवारों को मल्ला जोहार विकास समिति ने 2.10 लाख रुपये की सहायता राशि दी है। इसके अलावा मुनस्यारी महोत्सव कमेटी ने भी 33 हजार रुपये की धनराशि आपदा पीड़ितों को दी है। यह धनराशि शुक्रवार को मल्ला जोहार विकास समिति के अध्यक्ष श्रीराम सिंह धर्मशक्तू ने धापा गांव जाकर आपदा प्रभावितों को दी गई।
सड़कों पर नालियां और कलवर्ट न होने से हो रहा नुकसान
मुनस्यारी। जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने कहा कि अधिकांश गांवों में आपदा का कारण सड़कें हैं। निर्माणदायी संस्थाओं ने सड़कें तो काट दीं लेकिन उन सड़कों पर नालियां और उचित दूरी में कलवर्ट नहीं बनाए। इसके चलते बरसाती पानी गांवों को तबाह कर रहा है। उन्होंने सड़कों पर की जा रही लापरवाही की जांच करने की मांग की है।
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टांगा गांव में कोई ऐसा स्थान नहीं बचा है जो सुरक्षित हो। अब इस गांव को छोड़ना ही एकमात्र विकल्प है। सरकार प्रभावितों को उचित आर्थिक सहायता राशि दे ताकि सुरक्षित स्थान पर बस सकें। - सुंदर सिंह
पूरा गांव बरबाद हो गया है। अब कोई भी जगह रहने लायक नहीं है। सरकार को सभी परिवारों को तराई भाबर में शिफ्ट करना चाहिए। - द्रोपदी देेवी।
टांगा गांव के सभी आपदा प्रभावित परिवारों को शीघ्र सुरक्षित स्थान पर बसाना चाहिए। इस समय हमें सरकारी स्कूल में रखा गया है। यहां पर हमेशा नहीं रहा जा सकता है। धन गिरी।
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सभी आपदा प्रभावित परिवारों को एकमुश्त सहायता राशि देने की मांग सरकार से करते हैं। यदि आर्थिक सहायता मिली तो किसी भी सुरक्षित स्थान पर घर बना लेंगे। - देवकी देवी
मुनस्यारी के आपदाग्रस्त गांव में जांच करती भू वैज्ञानिकों की की टीम।- फोटो : PITHORAGARH