पिथौरागढ़। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावों के बीच बंगापानी तहसील के 26 से अधिक गांवों के लोगों को आज भी इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। आजादी के 77 और राज्य गठन के 24 साल बाद भी क्षेत्र में एलोपैथिक अस्पताल नहीं खुल सका है। ऐसे में लोग मामूली इलाज, गर्भवतियों की जांच और प्रसव के लिए 100 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं। बंगापानी तहसील क्षेत्र के करीब 26 से अधिक गांवों की 35 हजार की आबादी के उपचार के लिए आज तक क्षेत्र में एलोपैथिक अस्पताल नहीं खुल सका है। क्षेत्र के लोग आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। दूध और सब्जी बेचकर गुजारा करने वाले ग्रामीणों को जिला अस्पतालों में निशुल्क इलाज तो मिलता है, लेकिन उन्हें किराये में 700 रुपये से अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं। यदि समय पर जांच और इलाज नहीं हुआ तो क्षेत्र के लोगों के लिए होटलों में रुकना मजबूरी है। इसके लिए 500 से एक हजार1 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। क्षेत्र के लोग सालों से स्थानीय स्तर पर अस्पताल खोलने की मांग कर रहे हैं। अब तक उनकी नहीं सुनी गई है।
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आयुर्वेदिक अस्पताल में भी नहीं मिल रहा इलाज
पिथौरागढ़। करीब 60 साल पहले क्षेत्र के मवानी दवानी में आयुर्वेदिक अस्पताल खोला गया था। यहां मरीजों को कुछ हद तक राहत मिल रही थी। यहां तैनात चिकित्सक का स्थानांतरण होने के बाद नई नियुक्ति नहीं हुई। ऐसे में यहां लंबे समय से इलाज बंद है और क्षेत्र के मरीजों को इसके लिए भटकना पड़ रहा है। सर्दी, जुकाम और बुखार जैसे मामूली रोग के इलाज के लिए लोग जिला मुख्यालय की दौड़ लग रहे हैं। कोटॉ बंगापानी तहसील में अस्पताल खोलने के लिए दो साल पहले प्रस्ताव शासन को भेजा था, इसे स्वीकृति नहीं मिली। पीएचसी के लिए मानकों के अनुरूप आबादी जरूरी है। - डॉ. हीरा सिंह ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।