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जिले के पांच ब्लॉकों में 15गांव के लोग आज भी 5 से 42किमी पैदल चलने को मजबूर

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पिथौरागढ़। जिले के पांच ब्लॉकों में 23 गांवों की 20 हजार से अधिक लोग आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। इन गांवों के लोगों को पांच से 42 किमी की खड़ी और उबड़-खाबड़ यात्रा कर सड़क तक पहुंचना पड़ता है। इन गांवों में डोली ही मरीजों के लिए 108 का काम करती है। यहां स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं हैं।
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जिले के मुनस्यारी ब्लॉक के गांवों की सीमा चीन से लगी हैं। माइग्रेशन गांव रालम ग्राम के मिलम, पांछू, रालम, गनघर, लास्पा, बुर्फू, तल्ल गांव की 42 किमी की दूरी है। इन गांवों की आबादी करीब तीन हजार है। माइग्रेशन सीजन में ही यहां पर लोग रहते हैं। वहीं बुई, पातो, क्वीरीजिमिया और दुंगिया गांवों की दो हजार की आबादी को सड़क तक पहुंचने के लिए दुर्गम रास्तों में 10 किमी पैदल चलना पड़ता है। नामिक गांव की 1600 आबादी को 22 किमी पैदल चलना पड़ता है। धारचूला ब्लॉक के दो हजार की आबादी वाले कनार गांव के लोग 15 किमी डोली पर बीमारों को लाने को मजबूर हैं। मेतली के लोग 10 किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचते हैं। जबकि स्यांकुरी, गर्गुवा, गलाती ग्राम सभा, रमतोली और चौदास घाटी में जयकोट के लोग पांच से 10 किमी की पैदल यात्रा करते हैं।
गंगोलीहाट ब्लॉक के चमलेख, धूना गांव के लोग छह किमी खड़ी चढ़ाई कर सड़क तक पहुंचते हैं। गांव की आबादी 300 है। मूनाकोट ब्लॉक शिलिंग्या, भौरा और सोरया गांव आज भी सड़क से विहीन है। इन गांवों की 750 की आबादी को तीन से सात किमी की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। इन गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं है। लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना पड़ता है। कनालीछीना के चर्मा नदी के किनारे स्थित अमकोट और डुंगरी सहित आसपास के गांवों तक सड़क नहीं पहुंची है। यहां के लोगों को पांच किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर भागीचौरा या फिर ख्वांकोट आना पड़ता है। मितड़ा और खुचेटा गांवों के लोग भी वाहन पकड़ने के लिए पांच किमी की खड़ी चढ़ाई चलकर गुड़ौली पहुंचते हैं।
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वनराजि छह किमी पैदल चलने को मजबूर
डीडीहाट(पिथौरागढ़)। ब्लॉक के वनराजि गांव चौरानी की छह किमी की पैदल यात्रा करने को मजबूर हैं। गांव में तीस परिवार रहते हैं। गांव तक पहुंचने को खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। ऐसे में कोई चिकित्सक भी वहां जाना पसंद नहीं करता है। वनराजि भी चिकित्सकों के पास आने से बेहतर जंगल में मिलने वाले औषधीय पादपों के इस्तेमाल से अपनी बीमारी ठीक करते हैं। (संवाद)
माइग्रेशन गांव में बीमारों को लाने में होता है हेली का प्रयोग
पिथौरागढ़। जिले के मुनस्यारी ब्लॉक के माइग्रेशन गांवों में रहने वाले लोगों के बीमार होने पर कई बार उन्हें हेली से लाना पड़ता है। कई बार मौसम खराब होने के कारण रास्ते बेहद खतरनाक हो जाते हैं। ऐसे में प्रशासन हेली की मदद से मरीजों का उपचार को पिथौरागढ़ उपचार को लाता है। (संवाद)
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सड़क सुविधा से वंचित गांवों की सूची
-मुनस्यारी ब्लॉक के माइग्रेशन मिलम, पांछू, रालम, गनघर, लास्पा, बुर्फू, तल्ल,
-मुनस्यारी के बुई, पातो, कुरीजिमिया, दुंगिया गांव।
-धारचूला ब्लॉक के कनार, स्यांकुरी, गर्गुवा, गलाती, रमतोली, जयकोट, मवानी-दवानी।
-गंगोलीहाट के चमलेख और धूना गांव
-मूनाकोट ब्लॉक के शिलिंग्या, भौरा, सोरया
-डीडीहाट ब्लॉक का वनराजि गांव चौरानी
-कनालीछीना ब्लाक का मितड़ा मलान का मितड़ा और खुचेटा गांव, अमकोट, डुंगरी।
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