पिथौरागढ़। जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। यहां से बिना प्रतिस्थानी के 137 शिक्षकों का स्थानांतरण कर दिया गया। इससे शिक्षकों की कमी हो गई है। इसका सीधा असर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
पिथौरागढ़ जिले के विभिन्न इंटर काॅलेज और हाईस्कूलों से प्रवक्ता के 46 और एलटी संवर्ग के 91 शिक्षकों का स्थानांतरण जिले से बाहर हुए हैं। इसके सापेक्ष जिले में प्रवक्ता में 12 और एलटी संवर्ग में नौ शिक्षक ही पहुंचे।
पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे पिथौरागढ़ जिले में प्रवक्ता और एलटी के 2801 पदों के सापेक्ष केवल 1572 पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं। ऐसे में सीमांत जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई है।
वहीं विकासखंड धारचूला और मुनस्यारी के 90 फीसदी विद्यालयों की स्थिति बेहद खराब है। इन इलाकों में महत्वपूर्ण विषयों के अध्यापक लंबे समय से नहीं हैं। इससे उन विद्यालयों में छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन काफी प्रभावित हुआ है। शिक्षकों की तैनाती तो दूर जो शिक्षक यहां थे उन्हें भी अन्य जिलों में भेजे जाने के बाद यहां के लोगों में काफी नाराजगी है।
राइंका बरम में आठ शिक्षकों का एक साथ कर दिया स्थानांतरण
पिथौरागढ़। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे सीमांत जिले के कई विद्यालयों से एक साथ पांच से ज्यादा शिक्षकों के स्थानांतरण हुए हैं। इससे इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को पढ़ाने वाला कोई नहीं है। धारचूला ब्लॉक के राइका बरम में एक सात आठ शिक्षकों का स्थानांतरण हुआ है। 300 से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए अब केवल पांच शिक्षक ही तैनात हैं। महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने से हाईस्कूल और इंटर में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पठन-पाठन चौपट हुआ है। संवाद
सरकारी विद्यालयों में रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कई विद्यालयों में गेस्ट टीचरों की नियुक्ति की गई है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए पद भरे जाने तक अन्य माध्यमों से वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। - एचआर कोहली, सीईओ, पिथौरागढ़।