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Pithoragarh News: थल-मुनस्यारी सड़क पर 12 घंटे तक थमी रही रफ्तार

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थल-मुनस्यारी सड़क पर बनीक के पास गिरे बोल्डर। संवाद
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पिथौरागढ़/मुनस्यारी। सीमांत जिले के कई हिस्सों में बारिश से जनजीवन प्रभावित रहा। बारिश के बाद पर्यटन नगरी को जोड़ने वाली थल-मुनस्यारी सड़क पर मलबा और बोल्डर गिरने से 12 घंटे तक आवाजाही ठप रही। वहीं जौलजीबी-झूलाघाट और बांसबगड़-कोटा सड़क भी मलबा गिरने से बंद हैं। बारिश के बाद काली और गोरी नदी भी उफान पर आ गई। इससे किनारे बसी आबादी दहशत में रही।
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जिले के डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला, बंगापानी, कनालीछीना, तेजम, थल सहित अन्य हिस्सों में बारिश ने आफत फैलाई। बीते बृहस्पतिवार रात आठ बजे बारिश के बाद बनीक के पास मलबा और बोल्डर गिरने से थल-मुनस्यारी सड़क बंद हो गई। ऐसे में पर्यटक और यात्री वाहन फंसे रहे। रात में घंटों इंतजार के बाद भी सड़क न खुलने से वाहन चालक, पर्यटक और अन्य यात्रियों को वापस थल और मुनस्यारी लौटना पड़ा।
दूसरे दिन शुक्रवार सुबह आठ बजे के करीब मलबा और बोल्डर हटाकर आवाजाही शुरू कराई गई। बनीक के पास शुरुआती बारिश में ही मलबा और बोल्डर गिरने से सिलसिला फिर से शुरू हो गया है जो मानसूनी बारिश में आफत पैदा कर सकता है। मलबा आने से जौलजीबी-झूलाघाट और बांसबगड़-कोटा सड़क भी बंद हैं। इन सड़कों पर आवाजाही ठप रहने से 12 हजार से अधिक की आबादी को दिक्कत हुई है। बारिश के बाद जलस्तर बढ़ने से काली और गोरी नदियां भी उफान पर आ गईं। इससे किनारे बसी आबादी में दहशत है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र में हुई बारिश के बाद दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। संवाद
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पिथौरागढ़, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग में बारिश थमने से राहत
पिथौरागढ़। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक बीते 24 घंटे में जिला मुख्यालय के साथ ही बेड़ीनाग, गंगोलीहाट में बारिश का आंकड़ा शून्य रहा। बारिश थमने से लोगों को घरों से बाहर निकलने में आसानी हुई और उन्होंने राहत महसूस की। जिला मुख्यालय में मौसम का साथ मिलने से बाजार में भी रौनक रही।
डीडीहाट-आदिचौरा सड़क पर 23 दिन बाद भी शुरू नहीं हो सकी आवाजाही
पिथौरागढ़। डीडीहाट-आदिचौरा सड़क बीते 28 मई को मलबा आने से बंद हो गई थी। 23 दिन बाद भी यह सड़क नहीं खुल सकी है और आपदाकाल में बंद सड़कों को जल्द खोलने के दावे हवाई हुए हैं। इस सड़क के बंद होने से क्षेत्र की दो हजार से अधिक की आबादी को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। बीमारों और गर्भवतियों को भी मलबे के बीच बमुश्किल अस्पताल पहुंचाना क्षेत्र के लोगों की मजबूरी बन गया है।
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