पिथौरागढ़। पलायन से खाली हो चुके लमड़ा गांव में एक बीमार व्यक्ति को डोली के सहारे सड़क तक पहुंचाने के लिए लोग नहीं मिले। ग्रामीणों ने नेपाली नागरिकों की सहायता से तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर बीमार व्यक्ति को सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद निजी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां से मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे एसटीएच हल्द्वानी रेफर कर दिया है।
यहां के लोग लंबे समय से सड़क का निर्माण करने की मांग कर रहे हैं लेकिन 2006 में स्वीकृत होने के बावजूद अभी तक गांव में सड़क नहीं पहुंच पाई है। इस कारण लोग मजबूरी में गांव छोड़कर पलायन कर रहे हैं। गांव में अब 60 परिवारों में से सिर्फ 12 परिवार रह गए हैं।
50 वर्षीय प्रेम प्रकाश उपाध्याय को सांस लेने में दिक्कत हो गई। गांव से सड़क की दूरी तीन किमी होने और डोली के लिए लोगों के नहीं होने से परिजन परेशान हो गए है। किसी तरह गांव में बचे हुए 12 परिवारों के कुछ युवा एकत्र हुए। डोली के लिए कम लोग होने के बाद गांव में ही काम कर रहे नेपाली नागरिकों की मदद से प्रेम प्रकाश उपाध्याय को डोली के सहारे तपती धूप, खड़ी चड़ाई पार कर सड़क तक पहुंचाया। यहां से एक निजी वाहन से उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हायर सेंटर हल्द्वानी एसटीएच रेफर कर दिया है।
लंबे समय से लमड़ा गांव के लिए सड़क निर्माण की मांग की जा रही है। इसके बाद भी सड़क का निर्माण नहीं किया जा रहा है। सुविधा नहीं होने से लोगों को मजबूरन पलायन करना पड़ रहा है। सरकार को गांव तक सड़क पहुंचानी चाहिए। इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र दिया जाएगा।
हरीश उपाध्याय, पूर्व दर्जा राज्यमंत्री।
लमड़ा के लिए कसपतिया से सड़क स्वीकृत हैं। वन भूमि की सैद्धांतिक स्वीकृति नहीं मिल पाने से सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
मनीष खड़ायत, अपर सहायक अभियंता, लोनिवि अस्कोट।