गर्भवती को डोली के सहारे मुख्य सड़क तक लाते ग्रामीण। संवाद
- फोटो : गर्भवती को डोली के सहारे मुख्य सड़क तक लाते ग्रामीण। संवाद
बंगापानी (पिथौरागढ़)। इसे विडंबना ही कहेंगे कि देश को नौ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और एक वीर चक्र विजेता देने वाले गांव आलम-दारमा को अब तक ठीक से चलने लायक सड़क तक नसीब नहीं हो पाई है। क्षेत्र के लोग आज भी गर्भवतियों, बीमार और बुजुर्गों को डोली के सहारे लाने-ले जाने के लिए मजबूर हैं। कई बार मांग के बावजूद जिम्मेदारों ने अब तक उनकी समस्या की अनदेखी ही की है। इससे कई बार लोगों की जान पर बन आई है।
ग्रामसभा आलम दारमा की दीपा देवी (30) पत्नी हीरा सिंह धामी को बीते शुक्रवार की रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई। दीपा देवी के घर में फिलहाल सिर्फ महिलाएं ही हैं। उन्होंने सूचना गांव वालों तक पहुंचाई लेकिन तब तक काफी रात हो चुकी थी। बड़ी समस्या यह थी कि दारमा तक कट चुकी उबड़-खाबड़ और अत्यधिक खराब सात किलोमीटर लंबी सड़क से गर्भवती को अस्पताल कैसे पहुंचाया जाए। ग्रामीणों के अनुसार काफी संकरी और जगह-जगह पत्थरों से पटी इस सड़क पर दिन में ही वाहन चलाना काफी मुश्किल होता है। सड़क पर न नाली है और न कलवर्ट। मोड़ों पर आगे पीछे करके ही बमुश्किल गाड़ी चलानी पड़ती है। इन हालातों में ग्रामीणों ने गर्भवती को सुबह डोली के सहारे करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल ले जाना ही ठीक समझा। शनिवार को गर्भवती को बंगापानी लाने के बाद वाहन से धारचूला अस्पताल ले जाया गया जहां महिला ने बच्चे को जन्म दिया। बताया गया कि महिला के पति धारचूला में कार्यरत हैं।
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बोले जनप्रतिनिधि
लोनिवि डीडीहाट से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सड़क ठीक नहीं की जा रही है। अधिकारी कभी मशीन खराब होने की बात कहते हैं तो कभी तेल नहीं मिलने की बात करते हैं। - हंसा देवी, ग्राम प्रधान, आलम-दारमा