टनकपुर (चंपावत)। टनकपुर मंडल का सबसे बड़ा डिपो इस समय खुद वेंटिलेटर पर है। खटारा बसों के भरोसे चल रहे इस डिपो को तत्काल 26 नई बसों की दरकार है। टनकपुर डिपो की धारचूला रूट पर चालक की मौत के बड़े हादसे के बाद भी रोडवेज नहीं चेता है। हालत यह है कि मैदान में दौड़ रही 20 बसें अपना मानक (आठ साल या आठ लाख किमी) पूरा कर चुकी हैं, जिन्हें जुगाड़ और मरम्मत के सहारे दौड़ाया जा रहा है। बसों के इसी तोड़े के कारण पहाड़ के कई महत्वपूर्ण रूट बंद पड़े हैं।
वर्तमान में डिपो के पास निगम की 87 और अनुबंधित 23 बस हैं। इनमें पहाड़ के रूट में मात्र धारचूला और बेड़ीनाग रूट में चार बस चल रही हैं जबकि वर्तमान में डीडीहाट, झूलाघाट और नाचनी रूट के लिए छह बसों की मांग की गई है।
अनुबंधित बसों को दिल्ली चलाया जा रहा है
अनुबंधित बसों में 12 सीएनजी प्रतिदिन दिल्ली रूट चल रही हैं। देहरादून के लिए प्रतिदिन पांच बस डिपो से संचालित हो रही हैं। वर्तमान में डिपो की 20 पुरानी बसों को नीलामी के लिए खड़ा किया गया है। फिलहाल मांग के बावजूद नई बसों के उपलब्ध कराने के प्रति विभाग विफल साबित हो रहा है। इससे पहाड़ के रूटों में बेहतर यात्री सुविधा की पहल दम तोड़ रही है।
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टनकपुर डिपो को तत्काल पहाड़ रूट पर छह और मैदान में 20 नई बसों की आवश्यकता है।
-सुरेश चंद्र पांडेय, एआरएम