थल में बालेश्वर मंदिर समूह परिसर में स्थित प्राचीन पार्वती मंदिर दाईं तरफ के झुकने लगा है। इस कारण मंदिर को खतरा उत्पन्न हो गया है। कहा जाता है कि 12वीं सदी में राजा उद्योत चंद ने इस मंदिर की स्थापना की थी। मंदिर के ठीक नीचे बहने वाली बहुला नदी के किनारे से लगातार हो रहे खनन के कारण मंदिर की नींव कमजोर पड़ने का अंदेशा है।
बताया गया कि पार्वती का यह मंदिर धीरे-धीरे झुक रहा है। हालात यह हैं कि यह मंदिर किसी भी समय गिर सकता है। मंदिर को पत्थरों से तराशकर अद्भुत नक्काशी के साथ तैयार किया गया था। मंदिर में पार्वती की मूर्ति है। लोग भगवान शिव की पूजा के बाद पार्वती के मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष गणेश दत्त भट्ट ने बताया कि पिछले तीन साल के भीतर यह मंदिर अपने स्थान से करीब 25 डिग्री तक झुक गया है। उन्होंने मंदिर को हो रहे खतरे की जानकारी प्रदेश के मुख्य सचिव, कुमाऊं आयुक्त, पुलिस महानिदेशक, डीएम और पुरातत्व विभाग को दे दी है। उन्होंने आशंका जताई है कि मंदिर के ठीक नीचे नदी से हो रहे खनन के कारण ही यह समस्या पैदा हुई है।
उधर, पुरातत्व विभाग के प्रभारी डा. सीएस चौहान ने का कहना है कि कुमाऊं मंडल में जितने भी मंदिर खतरे में आ रहे हैं उनकी सूची तैयार की जा रही है। एक वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग की टीम ने मंदिर का निरीक्षण किया था और पार्वती मंदिर की सुरक्षा के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। डा. चौहान ने कहा कि जल्द ही मंदिर की सुरक्षा के उपाय किए जाएंगे।