सरकारी स्कूलों में तैनात एक शिक्षिका और एक प्रधानाध्यापक के नियमित रूप से स्कूल नहीं आने से भड़के अभिभावकों ने 45 मिनट तक बेड़ीनाग-हल्द्वानी मार्ग पर जाम लगाया। अभिभावकों ने मनाने के लिए आए अधिकारियों की एक नहीं सुनी गई। बाद में क्षेत्रीय विधायक मीना गंगोला के हस्तक्षेप पर ग्रामीणों ने जाम हटाया। जाम के कारण वाहनों की लंबी कतार लग गई और यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
प्रधान जगत सिंह के नेतृत्व में ग्वाल गांव के लोग रविवार सुबह से ही खैरोली में एकत्र होने लगे थे। सुबह 9.40 बजे ग्रामीणों ने खैरोली पुल पर जाम लगा दिया। इन लोगों का आरोप था कि प्राथमिक पाठशाला ग्वाल में तैनात एक शिक्षिका और जूनियर हाईस्कूल ग्वाल में तैनात प्रधानाध्यापक नियमित रूप से स्कूल नहीं आते हैं। अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षिका और प्रधानाध्यापक महीने में तीन-चार दिन ही स्कूल आते हैं। इस कारण दोनों स्कूलों में पढ़ाई चौपट हो गई है। कई बार मामला विभागीय अधिकारियों के सामने उठाया गया है, लेकिन स्कूल से नदारद रहने वाले गुरुजनों के खिलाफ विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। प्राइमरी स्कूल में 24 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए दो शिक्षक तो जूनियर हाईस्कूल में 80 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापक समेत 4 टीचर तैनात हैं।
वहीं, जाम लगने की सूचना पर तहसीलदार राधेश्याम राणा, सीआरसी समन्वयक महेंद्र वल्दिया और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। तहसीलदार ने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण शिक्षकों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। विधायक मीना गंगोला ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया। कहा कि यदि क्षेत्र के लोग उनके संज्ञान में पहले ही यह बात ले आते तो शिक्षकों के खिलाफ जांच बैठाकर कार्रवाई करा चुकी होती। विधायक ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि खंड शिक्षाधिकारी को गांव में बुलाकर दोनों पक्षों की बात सुनी जाएगी। टीचर दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कराई जाएगी। विधायक के आश्वासन पर लोगों ने 10.25 में जाम खोला। विरोध जताने वालों में रमेश बोरा, फकीर सिंह, आनंद सिंह, भूपाल सिंह, गीता देवी, सीमा देवी, मंजू देवी, राजेंद्र सिंह, सुंदर सिंह, मदन सिंह आदि शामिल थे।
अधिकारी सजग रहते तो नहीं लगता जाम
अभिभावकों ने 3 अप्रैल को जिला शिक्षाधिकारी बेसिक को ज्ञापन देकर ग्वाल प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका और जूनियर हाईस्कूल ग्वाल के प्रधानाध्यापक के स्कूल नहीं आने की शिकायत की थी। शिकायती पत्र की प्रति जिलाधिकारी, एसडीएम और खंड शिक्षाधिकारी को भेजी गई थी। साथ ही कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेेतावनी दी थी, लेकिन अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। नतीजतन जनता का गुस्सा फूटा और बेड़ीनाग-हल्द्वानी सड़क पर जाम लगाया।