पिथौरागढ़। बुवाई के मौसम में ईंधन संकट के कारण सीमांत जिले के 40 हजार से अधिक किसानों परेशानी हैं। बैलों से पारंपरिक खेती छूट गई है। मशीनों से खेतीबाड़ी के लिए ईंधन नहीं है। जिले में अधिकतर किसान पावर ट्रिलर पर निर्भर हैं।
कृषि विभाग ने पिछले पांच सालों में चार हजार से अधिक पावर ट्रिलर किसानों को उपलब्ध कराए। मौजूदा हालात में पेट्रोल पंपों पर सिर्फ वाहनों में ही ईंधन भरने का नियम लागू है। इससे किसानों को पावर टिलर के लिए बोतल या जार में ईंधन नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि ईंधन नहीं मिला तो पॉवर ट्रिलर से बुआई नहीं होगी। खेत बंजर रह जाएंगे और आधुनिक कृषि हमारे लिए बर्बादी से कम नहीं होगी।
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किसानों के लिए पेट्रोल पंपों तक पावर ट्रिलर पहुंचाना नामुमकिन
पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक, बोतल या जार में डीजल-पेट्रोल देने पर पूरी तरह रोक है। ऐसे में यदि किसानों को पावर ट्रिलर के लिए ईंधन की जरूरत है तो उन्हें इसे पेट्रोल पंपों तक पहुंचाना होगा।दुर्गम जिले में यदि किसानों को पावर ट्रिलर को पेट्रोल पंप तक लाना होगा तो उन्हें इसके लिए वाहन बुक करने होंगे। ऐसे में साफ है कि किसानों के लिए इन मशीनरी को पंपों तक पहुंचाना लगभग नामुमकिन है।
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बोले किसान
कृषि विभाग ने आधुनिक खेती के दावे कर हमें पॉवर ट्रिलर तो उपलब्ध करा दिए। अब इनके लिए ईंधन नहीं मिल रहा है। यदि ईंधन नहीं मिला तो बुवाई नहीं कर सकेंगे और खेत बंजर छोड़ने होंगे। जिम्मेदारों को इसका कोई विकल्प खोजना होगा। - हरीश, कनालीछीना
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पूर्व में कोई दिक्कत नहीं थी। अब पावर ट्रिलर के लिए ईंधन का इंतजाम करना मुश्किल हो गया है। बुवाई का सीजन चल रहा है। समय पर बुवाई नहीं हुई तो हमें इसकी मार सहनी होगी। प्रशासन को इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। - पूरन सिंह, किसान, बुंगाछीना
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देश में किसानों की हमेशा अनदेखी हुई है। आधुनिकता से जोड़ने के दावे कर पावर ट्रिलर उपलब्ध कराना हमारे लिए मुसीबत बन गया है। बैल पाले जाते तो यह दिन नहीं देखने पड़ते। फार्म मशीनरी के दावे हवाई हैं। - पुष्कर सिंह चौहान, बुंगाछीना
कोट
किसानों को फार्म मशीनरी के लिए ईंधन उपलब्ध कराने के लिए उच्चाधिकारियों से चर्चा की जाएगी। यदि किसानों को मशीनरी के लिए ईंधन नहीं मिला तो दिक्कत होगी। इस समस्या का समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा। - अमरेंद्र चौधरी, मुख्य कृषि अधिकारी, पिथौरागढ़