पिथौरागढ़। मानसूनी बारिश के कारण जिले में पेयजल दूषित हो गया है, जिससे टाइफाइड और डायरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल में पहुंचने वाला हर आठवां मरीज इन बीमारियों से ग्रसित मिल रहा है।
चिकित्सकों के अनुसार, दूषित पानी ही इन बीमारियों का प्रमुख कारण है। जिले की अधिकांश पेयजल योजनाएं नदियों और गधेरों से संचालित हैं, जहां बारिश का मलबा और गंदगी पहुंच रही है। इन योजनाओं में फिल्टर की कमी भी एक समस्या है। नगर और कस्बों में कई पेयजल लाइनें नालियों से गुजर रही हैं, जिनमें लीकेज से गंदा पानी घरों तक पहुंच रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 700 से अधिक मरीजों में 70 से 80 टाइफाइड या डायरिया के होते हैं। फिजिशियन डॉ. एमसी रजवार ने लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी है।
जिला अस्पताल में पहुंचने वाले अधिकांश लोग टायफाइड और डायरिया से ग्रसित मिल रहे हैं। दूषित पानी ही इन बीमारी का प्रमुख कारण है। मानसूनकाल में लोगों को शुद्ध पानी का उपयोग करना आवश्यक है। मरीजों का बेहतर इलाज किया जा रहा है।
-डॉ. डीपी सिंह, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़