पिथौरागढ़। लक्ष्मण सिंह महर परिसर के पुस्तकालय से प्रबंधन और विद्यार्थियों की लापरवाही से एक हजार से अधिक किताबें गायब हो गई हैं। छात्र-छात्राओं ने पुस्तकालय से किताबें लीं, लेकिन तय समय के बाद भी इन्हें वापस नहीं किया। किताब लेकर संबंधित छात्र कहां गए इसका प्रबंधन को पता नहीं है। ऐसे में प्रबंधन परेशान है तो नया प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को किताबें नहीं मिल पा रही हैं।
पिथौरागढ़ परिसर में हर साल तीन से चार हजार विद्यार्थी पढ़ाई के लिए यहां स्थित पुस्तकालय से किताबें लेते हैं। पढ़ाई के बाद पुस्तकों को तय समय पर वापस करने का नियम है। एक साल के भीतर 120 से अधिक विद्यार्थियों ने पुस्तकालय को किताबें नहीं लौटाई हैं। इन पुस्तकों की संख्या एक हजार से अधिक है। स्नातक के बाद ये छात्र किताब लेकर कहां गायब हो गए, इसका पता प्रबंधन को नहीं है। प्रबंधन संबंधित छात्रों से संपर्क कर किताब लौटाने की गुहार लगा रहा है। पुस्तकालय में किताबों की कमी हो गई है। नए विद्यार्थियों को किताब उपलब्ध कराना पुस्तकालय प्रबंधन के लिए चुनौती बन गया है। संवाद
तय समय पर किताब नहीं लौटाने पर लिया जाता है 50 रुपये अर्थदंड
पिथौरागढ़। तय समय पर किताब न लौटाने पर पुस्तकालय प्रबंधन संबंधित विद्यार्थियों से 50 रुपये अर्थदंड लेता है। अर्थदंड तभी चुकता होगा जब संबंधित विद्यार्थी किताब लौटाने पुस्तकालय पहुंचेगा। लंबे समय से किताब लेकर वापस न लौटाने वाले विद्यार्थियों की खोजबीन जारी है। ऐसे में विद्यार्थियों का पता न चलने पर पुस्तकालय प्रबंधन को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। न तो किताब वापस मिल रहीं और ना ही अर्थदंड। कोट
किताबें वापस नहीं लौटा रहे विद्यार्थियों से लगातार संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। संबंधित विद्यार्थियों का पता लगाने की कोशिश जारी है। - डॉ. मनोज मेहता, पुस्तकालय सहायक, पिथौरागढ़ परिसर।