पिथौरागढ़ से कस्बों और नगरों को नहीं जाती रोडवेज की यह बसें
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राज्य गठन के बाद रोडवेज ने कस्बों और नगरों की अपनी सेवाएं एक-एक कर समेटनी शुरू कर दी। स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय से किसी भी नगर और कस्बे के लिए रोडवेज की बस सेवा का संचालन नहीं होता। कुछ स्थानों से दिल्ली और देहरादून के लिए बसें तो चल रही हैं, लेकिन यह सेवाएं भी नियमित नहीं हैं। इसका फायदा सीधे-सीधे निजी वाहन चालकों ने उठाना शुरू कर दिया। रोडवेज के अधिकारियों का कहना है कि आमदनी कम होने के कारण यह सेवा बंद करनी पड़ी थी। सेवाएं बंद होने का खामियाजा बुजुर्गों, स्वाधीनता सेनानियों एवं अन्य आम यात्रियों को उठाना पड़ रहा है। रोडवेज के पास अभी ऐसी कोई योजना नहीं है कि बंद पड़ी बस सेवाओं को फिर से संचालित किया जाए।
बताया गया कि यूपी के समय में ग्रामीण क्षेत्रों को सरकारी परिवहन सेवा से जोड़ने की पहल की गई थी। राज्य गठन से पहले पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, पांखू, थल, मुवानी, धारचूला, मुनस्यारी के लिए नियमित बस सेवाएं संचालित होती थी। राज्य गठन के बाद लोगों को उम्मीद थी कि शायद इन सेवाओं में सुधार आएगा, लेकिन सरकार ने एक-एक कर बस सेवाओं को समेटना शुरू कर दिया। इस समय जिले के किसी भी कस्बे से जिला मुख्यालय के लिए सीधी बस सेवा नहीं है। रोडवेज के पास बसें तो हैं, लेकिन अब ड्राइवरों की कमी से बसें नहीं चल पा रही हैं। देश के जिन नगरों के लिए बसों का संचालन शुरू किया गया था वह भी ड्राइवर न होने से बंद पड़ी हैं।
प्रबंधन कोई ध्यान नहीं देता
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के नेता मोहन भंडारी का कहना है कि रोडवेज के प्रबंध मंडल के सामने कई बार कस्बों और नगरों की सेवाएं शुरू करने की मांग रखी गई, लेकिन प्रबंधन रोडवेज के हित में कोई कदम उठाने को तैयार ही नहीं है। वह कहते हैं कि यदि जिला मुख्यालय से सीधे नगरों और कस्बों के लिए सेवा शुरू हो जाए तो रोडवेज की आमदनी बढ़ जाएगी।
सरकार पर बनाएंगे दबाव
भाजपा विधायक विशन सिंह चुफाल का कहना है कि सरकार पर कस्बों और नगरों की बस सेवा शुरू करने के लिए दबाव बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को इस तरह की अव्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। सबसे खास बात यह है कि परिवहन मंत्रालय मुख्यमंत्री के ही पास है। उन्होंने कभी इस पर गौर नहीं किया।