लगता है शिकारियों ने अब अपना ठिकाना बदल दिया है। पिछले दिनों पंचाचूली की तलहटी में आग लगाकर जानवरों को मारने वाले शिकारियों ने अब छिपलाकेदार की तलहटी में आग लगानी शुरू कर दी है। भयानक आग के साथ निकल रहा धुआं छिपलाकेदार की चोटी तक पहुंच रहा है। 24 घंटे से धधक रही इस आग पर काबू पाने के लिए अब तक न तो वन विभाग और न ही प्रशासन ने कोई कदम उठाया है।
छिपलाकेदार की चोटियों पर हिमपात के बाद जंगली जानवर निचले इलाके की तरफ रुख करते हैं। इसका फायदा उठाते हुए शिकारी आग लगाकर उनको घेर लेते हैं। इस बार आग इतनी भीषण तरीके से लगाई गई है कि उसने करीब एक किलोमीटर के एरिया को कवर कर लिया है, जबकि धुआं आसमान में लगभग तीन किलोमीटर तक फैल गया है। इससे पहले शिकारियों ने पंचाचूली की तलहटी में आग लगाई थी। मुनस्यारी के तत्कालीन एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा के निर्देश पर एक टीम ने पंचाचूली की तलहटी तक शिकारियों को पकड़ने के लिए चेकिंग अभियान चलाया, लेकिन शिकारी हाथ नहीं आए। अब शिकारी छिपलाकेदार की तलहटी तक पहुंच गए हैं। यह इलाका बरम और बंगापानी के पास पड़ता है। स्थानीय लोग भीषण आग और धुएं को देखकर हैरान हैं। उनका कहना है कि वन्यजीव तस्करों को किसी का भय नहीं रह गया है। छिपलाकेदार की पहाड़ियों पर कस्तूरी मृग, मोनाल, भालू पाए जाते हैं। आग लगने से उनके लिए गंभीर खतरा हो गया है।
इधर, जिलाधिकारी एचसी सेमवाल ने वन विभाग के अधिकारियों से कहा है कि शिकारियों को पकड़ने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए। यदि वन विभाग को पुलिस की जरूरत पड़ेगी तो उपलब्ध कराई जाएगी।