शासन ने मुनस्यारी नगर पंचायत के गठन के लिए सात अक्तूबर 2014 को जारी अधिसूचना को निरस्त कर दिया है। यह बात अलग है कि अधिसूचना जारी होने के करीब दो साल बाद भी नगर पंचायत अस्तित्व में नहीं आ पाई थी। नगर पंचायत में शामिल किए गए ग्राम पंचायतों के विरोध के चलते अब तक यह संभव नहीं हो पाया था। 2014 में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुनस्यारी भ्रमण के समय नगर पंचायत के गठन की घोषणा की थी।
उत्तराखंड शासन के शहरी विकास विभाग के सचिव डीएस गर्ब्याल की ओर से 22 अगस्त को जारी आदेश में कहा गया है कि मुनस्यारी नगर पंचायत के गठन के लिए जारी की गई अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया है और इसे राज्यपाल ने मंजूरी भी दे दी है। अब मुनस्यारी नगर पंचायत के गठन की सारी संभावनाओं पर विराम लग गया है। शहरी विकास विभाग ने इस आशय की सूचना जिलाधिकारी समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को दे दी है। मुनस्यारी नगर पंचायत के लिए जब परिसीमन किया गया था, तब उसमें मल्लाघोरपट्टा, तल्लाघोरपट्टा, बुंगा, सरमोली और जैंती ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया था। इन पांचों ग्राम पंचायतों के लोगों ने नगर पंचायत में शामिल होने का विरोध करते हुए कई बार आंदोलन भी किया।
लोगों को आशंका थी कि नगर पंचायत में शामिल होने के बाद इन गांवों के लोगों को नगरीय टैक्स के दायरे में लिया जाएगा और ग्राम पंचायतों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए वन विकास निगम के अध्यक्ष हरीश धामी ने लोगों की बैठक भी ली थी और कहा था कि यदि लोग नगर पंचायत के गठन से सहमत नहीं होंगे तो इसे वापस लेने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने लोगों को इसके लिए समय भी दिया था। आखिरकार शासन ने नगर पंचायत के गठन का फैसला वापस ले लिया है और ग्राम पंचायतों का अस्तित्व पहले की तरह बना रहेगा।