नोटबंदी के बाद जिस तरह कालाधन समाप्त होने और देश के लोगों के लिए अच्छे दिन आने की बात की जा रही है, उसी के बीच में एक ग्रामीण ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को मार्मिक पत्र भेजकर कहा है कि गरीबों के लिए अब दो वक्त का राशन जुटाना भी मुश्किल हो गया है। देवलथल तहसील के चौपाता गांव निवासी देव सिंह ने पत्र में उल्लेख किया है कि जिन लोगों के पास राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के कार्ड हैं, उनको डेढ़ किलो प्रति यूनिट के हिसाब से गेहूं दिया जा रहा है, जबकि राज्य खाद्य योजना में गेहूं का कोटा मिल ही नहीं रहा है। राज्य खाद्य योजना के राशन में मिलने वाले चावल में भी कटौती कर दी गई है। पहले प्रति कार्ड 15 किलो गेहूं मिलता था। अब इसे घटाकर 10 किलो कर दिया गया है।
देव सिंह ने जानना चाहा है कि जो लोग सिर्फ सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से मिलने वाले राशन पर निर्भर हैं, उनका क्या होगा। नोटबंदी की वजह से लोगों के काम छिन गए हैं। बाजार से महंगा राशन खरीद पाने की स्थिति में कोई नहीं है। सूखे से खेतों में फसल सूखने लगी है। गरीबों के सामने कई तरह की मुसीबतें आने लगी हैं। उन्होंने यह भी पूछा है कि सरकारी दुकानों से मिलने वाले राशन के रेट क्या हैं, क्योंकि इस राशन के मनमाने रेट वसूले जाते हैं।
उन्होंने मांग की है कि सरकारी दुकानों के बाहर रेट लिस्ट लगाई जाए, प्रति यूनिट मिलने वाले राशन का ब्योरा दिया जाए। जनप्रतिनिधियों से भी उन्होंने सवाल किया है कि क्या उनको यह बुनियादी समस्या नजर नहीं आती। प्रधानमंत्री से उन्होंने अपेक्षा की है कि उनके पत्र का जवाब जरूर देंगे।