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मुनस्यारी में नहीं बना उच्च शिक्षा का माहौल

Sat, 28 Jan 2017 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनस्यारी
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मुनस्यारी का राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
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शासन ने मुनस्यारी में डिग्री कॉलेज की स्थापना वर्ष 2000 में कर दी थी, लेकिन अब तक इस कॉलेज में उच्च शिक्षा का माहौल नहीं बन पाया है। कॉलेज में सिर्फ गरीब परिवारों के बच्चे ही पढ़ाई के लिए आते हैं। 550 की छात्रसंख्या वाले इस कॉलेज में दो विषयों में पीजी की पढ़ाई भी होती है, लेकिन स्टाफ की कमी से यहां पर विद्यार्थियों को अब तक पढ़ाई की बेहतर सुविधा नहीं मिल पाई है।
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वर्ष 2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी ने कॉलेज की आधारशिला रखी थी, लेकिन अब भी कॉलेज जीआईसी के पुराने भवन में ही संचालित हो रहा है। कॉलेज में प्राचार्य का पद लंबे समय से रिक्त है। पिथौरागढ़ कॉलेज के प्राचार्य डा. डीएस पांगती को यहां का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। स्नातक और पीजी की कक्षाओं के संचालन के लिए यहां पर कम से कम 13 प्राध्यापकों की जरूरत है, लेकिन मात्र सात प्राध्यापक यहां काम कर रहे हैं।

इनमें भी छह प्राध्यापक संविदा वाले हैं। मात्र एक स्थायी प्राध्यापक के सहारे कॉलेज का संचालन हो रहा है। कॉलेज के आफिस का कामकाज संभालने के लिए सिर्फ एक संविदा क्लर्क की नियुक्ति की गई है। चतुर्थ श्रेणी में कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं है। कॉलेज के भवन निर्माण की प्रक्रिया तो शुरू हो गई है, लेकिन भवन कब तक बनेगा कहा नहीं जा सकता।
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बलुवाकोट कॉलेज की दशा भी खराब
धारचूला। धारचूला विधानसभा क्षेत्र में दूसरा कॉलेज बलुवाकोट में है। इस कॉलेज में भी स्टाफ, खेल मैदान, पुस्तकालय की भारी कमी है। कई बार कॉलेज की समस्याओं को लेकर आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार इस कॉलेज में न तो पर्याप्त स्टाफ की ही व्यवस्था कर पाई है और न सुविधाओं का विस्तार किया गया है। बलुवाकोट में कॉलेज को इसलिए खोला गया था, ताकि धारचूला, जौलजीबी, कालिका समेत आसपास के गांवों के विद्यार्थी यहां पढ़ाई कर सकें।
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