बसों के लिए 40 टायर आने के बाद भी यहां से रोडवेज बसों का संचालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। हालांकि अभी टायरों की और जरूरत है, कुछ बसों के लिए अभी टायर नहीं हैं। शनिवार को रोडवेज स्टेशन में यात्रियों की भारी भीड़ रही। यहां से दिल्ली, देहरादून, बरेली जाने के लिए बस नहीं मिली। अधिकारियों ने बताया कि जो बसें दिल्ली, देहरादून से यहां आएंगी, उनको ही उसी समय यात्रियों को भरने के बाद वापस भेजा जाएगा, जबकि नियमानुसार लंबे रूट से आने वाली बस को रेस्ट देना होता है और उसका मेंटेनेंस करना पड़ता है।
बताया गया कि रोडवेज के बस बेड़े में यहां पर मात्र 60 बसें उपलब्ध हैं। इनमें से दस बसें तकनीकी खराबी के कारण वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं। करीब सात बसों का संचालन शनिवार को टायरों की कमी के कारण नहीं हो पाया। अधिकारी इस बात से लाचार हैं कि उनको प्रबंधन की ओर से समय पर सामग्री नहीं दी जाती। रोडवेज की इस दुर्दशा का फायदा प्राइवेट वाहन स्वामी उठा रहे हैं। कई यात्रियों ने शनिवार सुबह टनकपुर और हल्द्वानी तक के लिए जीपों का सहारा लिया। इनमें उनको डेढ़ गुना किराया ज्यादा देना पड़ा। जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र बिष्ट ने कहा कि ठीक पर्यटन सीजन में इस तरह की अव्यवस्था ठीक नहीं है।
कर्मचारी संगठन लगातार उठा रहे मांग
पिथौरागढ़ रोडवेज की वर्तमान हालातों से चिंतित रोडवेज कर्मचारी संगठन लगातार प्रबंधन पर दबाव बना रहे हैं। पिछले दिनों इस मुद्दे पर सहायक महाप्रबंधक दीपक मेहरा का घेराव तक किया गया। कर्मचारी नेता मोहन सिंह का कहना है कि रोडवेज बसों का संचालन न होने से कर्मचारियों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था सुधरने तक आंदोलन जारी रहेगा।
जनप्रतिनिधि नहीं उठाते आवाज
यह जानकर आश्चर्य होगा कि रोडवेज की खस्ता हालत को लेकर कोई भी जनप्रतिनिधि आवाज नहीं उठाता। लंबे समय से टायरों की कमी से बसें खड़ी हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर पहल नहीं हुई। जिला स्तर के प्रशासनिक अधिकारी कभी ऐसे मामलों का संज्ञान नहीं लेते। इस कारण भी समस्या गंभीर होती जा रही है।