मांगती में 13 अगस्त की देर रात तबाह हुई सड़क की मरम्मत अब तक नहीं हो पाई है। इस कारण तवाघाट से मांगती होते हुए गर्बाधार तक वाहनों की आवाजाही बंद है और लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। मांगती से थोड़ा पहले ब्यालधार में चट्टानें टूटकर गिरने से भी आवाजाही पर असर पड़ा है।
मांगती में 13 अगस्त की देर रात भारी तबाही मची थी। इससे सेना के ट्रांजिट कैंप, दुकानों, पुल को नुकसान पहुंचा था। कई लोग इस हादसे में लापता हो गए। सीमा सड़क संगठन ने आपदा के तुरंत बाद मांगती पुल पर गिरे मलबे को तो हटा दिया, लेकिन टूटी हुई सड़क की मरम्मत अब तक नहीं हो पाई है। वहीं, मांगती से आगे गर्बाधार तक दो किलोमीटर सड़क सही हालत में है, लेकिन वहां तक वाहनों का पहुंच पाना संभव नहीं है। इस समय वाहन तवाघाट से ब्यालधार तक ही जा पा रहे हैं। वहां से गर्बाधार जाने वालों को तीन किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस गति से काम हो रहा है, उसे देखकर लगता है कि अगले 15 दिन तक इस सड़क पर यातायात सामान्य नहीं हो पाएगा। लोगों को जरूरी सामान पैदल ढोकर ले जाना पड़ रहा है। बीमार और बुजुर्ग लोग सड़क बंद होने से ज्यादा परेशानी में हैं।
इधर, एसडीएम आरके पांडे ने सीमा सड़क संगठन के अधिकारियों से कहा कि सड़क खोलने का काम शीघ्र करें, ताकि तवाघाट से गर्बाधार के बीच वाहनों की आवाजाही हो सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन बंद सड़कों और रास्तों को खोलने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
मालपा तक अभी नहीं बना रास्ता
बूंदी से मालपा के बीच टूटा हुआ पैदल रास्ता अब तक नहीं बन पाया है। इस कारण बूंदी से मालपा होते हुए आगे जाने वाले खासे परेशान हैं। मालपा में रास्ता बनाने के लिए 80 मजदूर लगाए गए हैं, लेकिन मलबा ज्यादा होने के कारण काम करने में दिक्कत आ रही है। लोनिवि के अधिकारियों का कहना है कि रास्ता बनाने का काम जारी है। जिलाधिकारी सी रविशंकर रोज रास्ते की रिपोर्ट ले रहे हैं।