मान्यता के 19 साल बाद भी राजकीय इंटर कॉलेज अस्कोट का भवन न बनने का मामला गरमाने लगा है। अभिभावक जीआईसी के भवन के निर्माण के लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। 260 छात्रसंख्या वाले सरकारी इंटर कॉलेज का संचालन 60 साल पुराने जूनियर हाईस्कूल के भवन में होता है।
अस्कोट में कक्षा 8 तक की शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 1956 में जूनियर हाईस्कूल खोला गया। वर्ष 1985 में इस स्कूल को हाईस्कूल की मान्यता मिली। वर्ष 1997 में इंटर का दर्जा मिला। हाईस्कूल की मान्यता मिलने के बाद ही लोगों को उम्मीद थी कि हाईस्कूल के अनुसार अनुमन्य सुविधाएं अस्कोट स्कूल को मिलेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 19 साल बाद भी इंटर तक की शिक्षा देने वाले संस्थान का अब तक अपना भवन नहीं है।
हालांकि, मार्च 2011 में क्षेत्र के दौरे पर आए तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने जीआईसी भवन के लिए 25 लाख रुपये देने की घोषणा की। यह घोषणा भी हवाई ही रही। वर्ष 2013 में लैब निर्माण के लिए 8 लाख रुपये मंजूर हुए। बजट कम होने से लैब भी नहीं बन सका। पीटीए अध्यक्ष वीरजंग पाल, एसएमसी अध्यक्ष दानी राम कहते हैं कि भवन खतरे में है। दुर्घटना का अंदेशा है। कई बार प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन भवन निर्माण के लिए धन नहीं दिया जा रहा है। कहा कि पिछले साल ही स्कूल की छात्रसंख्या 300 से अधिक थी, जो लगातार घट रही है। राजकीय शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष गोविंद भंडारी इसके लिए सरकार और विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार बताते हैं।
हाल में उन्होंने स्कूल का दौरा किया था। भवन निर्माण के लिए विधिवत प्रस्ताव मंगाया जा रहा है। भवन के लिए धन मंजूर कराया जाएगा। -हरक राम कोहली, खंड शिक्षाधिकारी, कनालीछीना।