अस्कोट (पिथौरागढ़)। पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अस्कोट में एक करोड़ की लागत से अभियान (एक्सपीडिशन) हॉस्टल का निर्माण किया गया था। हॉस्टल बनने के बाद लोगों को क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के रफ्तार पकड़ने और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की आस भी थी, लेकिन सालों बाद भी अभियान हॉस्टल निष्प्रयोज्य पड़ा है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने वर्ष 2001 में अस्कोट के खोलिया गांव में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अभियान हॉस्टल की स्वीकृति दी थी। पाल राजाओं की राजधानी रही अस्कोट में हॉस्टल की स्वीकृति से लोगों को पर्यटन गतिविधियों में बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी।
वर्ष 2001 से पर्यटन विभाग ने लाखों की लागत से अभियान हॉस्टल का निर्माण शुरू किया। इसमें करीब 30 लोगों के रहने के लिए व्यवस्था है। वर्ष 2015 आते-आते हॉस्टल की लागत एक करोड़ रुपये तक पहुंच गई। अब निर्माण के पांच साल बाद भी हॉस्टल के दरवाजों पर ताला लटका है।
आसपास झाड़ियां उग आई हैं। देखरेख के अभाव में हॉस्टल सफेद हाथी बना है। पर्यटन विभाग ने इसके संचालन के लिए निविदा भी निकाली थी, लेकिन किसी भी संस्था ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसे में इसके शीघ्र संचालन की उम्मीद कम ही लग रही है।
पर्यटन विभाग को अभियान हॉस्टल शुरू कराने के लिए तेजी से कार्यवाही करनी चाहिए। हॉस्टल शुरू होने से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ ही क्षेत्र को अलग पहचान मिलेगी। - विनीता पाल, जिला पंचायत सदस्य
करोड़ों की लागत से बना एक्सपीडिशन हॉस्टल सफेद हाथी बना है। हॉस्टल का संचालन शुरू होने से लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलता लेकिन इसके संचालन के लिए कोई सार्थक पहल नहीं की गई। - प्रदीप पाल, वरिष्ठ कांग्रेसी
अस्कोट में निर्मित अभियान हॉस्टल के संचालन के लिए निविदाएं निकालीं थीं। दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण संस्थाएं इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रही हैं। इसके संचालन के लिए प्रयास जारी हैं। - अमित लोहनी, जिला पर्यटन अधिकारी, पिथौरागढ़।