पिथौरागढ़। कोरोना संक्रमण के चलते विद्यालय बंद हैं। इससे बच्चों पर बूरा असर पड़ रहा है। उनकी पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ वह स्वतंत्रता दिवस, कृष्ण जन्माष्टमी, बाल दिवस समेत कई कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा नहीं दिखा पा रहे हैं।
चाचा नेहरू के जन्मदिन बाल दिवस का इंतजार बच्चे सालभर से करते हैं। लेकिन इस बार कोरोना के कारण सिर्फ हाईस्कूल और इंटर के बच्चों के लिए स्कूल खोले गए हैं। ऐसे में अन्य कक्षाओं के छात्र बेहद मायूस हैं। प्रधानाचार्य मोहन चंद्र पाठक ने बताया एसडीएस स्कूल में बाल दिवस को जरूरतमंद और प्रतिभाशाली छात्रों को छात्रवृत्तियां वितरित की जाती थी। इस बार कार्यक्रम स्थगित किया गया है।
आजादी के बाद चाचा नेहरू ने हम बच्चों के लिए विशेष योजना बनाई। हम प्यारे चाचा को बार बार प्रणाम करते हैं। उनके जन्म दिवस को न मनाने का मलाल रहेगा।
दिव्या कापड़ी, छात्रा
चाचा नेहरू का जन्मदिन बाल दिवस के रूप मे मनाते हैं। इस बार स्कूल बंद होने से किसी भी प्रकार के कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं। जल्द कोरोना खत्म हो तो हमें भी स्कूल जाने का मौका मिले।
तेजस्वी आकोटी, छात्रा
बच्चे घर पर ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। स्कूल में बच्चे आपस में मिलते हैं किंतु आपसी दूरी से बच्चों का मन बहलाव नहीं हो पाता, जिससे तनाव की शिकायत बच्चों में होने लगी है।
मंगल सिंह, अभिभावक
हम घर पर ही चाचा नेहरू का जन्म दिवस मनाएंगे। स्कूल बंद होने से हमें अपने सहपाठियों की कमी खल रही है। कई महत्वपूर्ण विषय को लेकर चर्चा करते थे। लेकिन अब बेहद मुश्किल हो रही है।
कन्हैया गुप्ता, छात्र
बाल दिवस के दिन बच्चों के साथ विद्यालय जाता था। उनके कार्यक्रम देखकर बेहद अच्छा लगता था, लेकिन इस बार कोरोना के कारण जा पाना संभव नहीं है।
रामनंदन गुप्ता, अभिभावक
इंटर की ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है। लेकिन कक्षा-कक्ष शिक्षण ऑनलाइन शिक्षण से बेहतर होता है। विद्यालय में होने वाली प्रतियोगिताओं से भी वंचित होना पड़ रहा है।
संजू चुलकोटिया, छात्रा
बच्चों को घर में संभालना मुश्किल होता है। घर पर रहकर माता के अनुशासन में बच्चे नाराजगी व्यक्त करते हैं। विद्यालय में बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है।
पूजा चुलकोटिया, अभिभावक
बाल दिवस के उपलक्ष्य पर छात्रवृत्ति मिलने वाली थी। इस बार बाल दिवस का आयोजन नहीं है। ऐसे में बड़ी मायूसी है। सबके सामने सम्मान मिलना एक सुखद अनुभव दिलाता है।
रोहित, छात्र
स्कूल बच्चों के मानसिक विकास के लिए बेहतर जरूरी हैं। स्कूल बंद होने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। स्कूल बंद होने से बच्चों का सामाजीकरण नहीं हो पा रहा है।
गुरप्रीत सिंह, प्रवक्ता मनोविज्ञान, पिथौरागढ़ महाविद्यालय।