पिथौरागढ़। सीमांत जिले में नई एंबुलेंस न मिलने से आपातकालीन सेवा 108 की सेहत खराब हो गई है जो मरीजों और गर्भवतियों पर भारी पड़ रही है। प्रदेश के साथ ही जिले में पुरानी-खटारा आपातकालीन 108 एंबुलेंस मरीजों और गर्भवतियों की जान आफत में डाल रही हैं। आए दिन पुरानी एंबुलेंस खराबी आने से रास्ते में खड़ी हो रही हैं और मरीजों, गर्भवतियों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन रहा है।
सीमांत जिले के आठ ब्लॉकों की छह लाख की आबादी को आपात स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 सेवा की 18 एंबुलेंस का संचालन हो रहा है। इनमें से आठ एंबुलेंस वर्ष 2019 में खरीदी गईं जो मानकों के अनुसार एक लाख किलोमीटर से अधिक का सफर कर बूढ़ी हो चुकी हैं। अपनी उम्र पार कर चुकीं ये एंबुलेंस आए दिन खराब होकर मरीजों को रास्तों पर धोखा देते हुए खड़ी हो रही हैं। नियमों के मुताबिक अब इनका संचालन करना मरीजों और गर्भवतियों की सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है। इन्हें बदला जाना चाहिए। मरीजों और गर्भवतियों की सुरक्षा को देखते हुए इन्हें बदलकर जरूरत के मुताबिक 10 नई एंबुलेंस का प्रस्ताव एक साल पहले शासन में भेजा गया था। हैरानी है कि अब तक यह प्रस्ताव शासन में धूल फांक रहा है और मरीज, गर्भवतियां जान जोखिम में डालकर पुरानी-खटारा एंबुलेंस में सफर कर अस्पताल पहुंचने के लिए मजबूर हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि नई एंबुलेंस मिलने की उम्मीद में जिले में इनकी तैनाती के लिए डूनी, गुंजी सहित सात नई लोकेशन खोजने में भी जल्दबाजी दिखाई। नई एंबुलेंस न मिलने से यह योजना भी दम तोड़ गई है।
नौ महीने से लटकी है नई एंबुलेंस खरीदने की टेंडर प्रक्रिया
पिथौरागढ़। प्रदेश के सभी जिलों में आपात स्थिति से निपटने के लिए 250 से अधिक 108 एंबुलेंस का संचालन होता है। इनमें से वर्ष 2019 में खरीदी गईं 120 से अधिक एंबुलेंस सड़कों पर दौड़ने के मानक पूरी कर चुकी हैं। नौ महीने पूर्व जनवरी महीने में इनकी जगह नई एंबुलेंस खरीदने की प्रक्रिया शुरू हुई। बकायदा इसके टेंडर भी निकाले गए। हैरानी है कि अब तक भी यह प्रक्रिया अटकी है और प्रदेश भर के मरीज और गर्भवतियां पुरानी-खटारा एंबुलेंस के सहारे अस्पताल पहुंच रही हैं। संवाद
एंबुलेंस की कमी से भी खतरा
पिथौरागढ़। जिले में खटारा हो चुकीं एंबुलेंस रास्तों पर धोखा दे रही हैं तो अन्य को जिले के अस्पतालों से रेफर मरीजों को हायर सेंटर पहुंचाने के लिए हल्द्वानी भेजा जा रही है। 108 प्रबंधन के मुताबिक, रोजाना जिला, महिला और जिले के अन्य अस्पतालों से रेफर मरीजों को हल्द्वानी, बरेली के हायर सेंटर पहुंचाने के लिए तीन से चार एंबुलेंस भेजी जा रही हैं। स्थानीय एंबुलेंस को हायर सेंटर भेजने से अन्य जगह से मरीज और गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने में अधिक समय लग रहा है। समय पर एंबुलेंस न मिलने से मरीजों और गर्भवतियों की जान का खतरा है। संवाद
कोट-जिले में नई एंबुलेंस की जरूरत है। मौजूदा एंबुलेंस की समय-समय पर फिटनेस होती है। हर मरीज और गर्भवती को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध कराने और उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 प्रबंधन गंभीर है। उम्मीद है जल्द नई एंबुलेंस मिलेंगी।
भाष्कर शर्मा, जिला प्रभारी, आपातकालीन सेवा 108, पिथौरागढ़
कोट-नई एंबुलेंस की मांग की गई है। पूर्व में ही इसका प्रस्ताव भेजा गया है। निश्चित तौर पर जिले में नई एंबुलेंस की अत्यधिक जरूरत है। इस संबंध में निदेशालय से भी लगातार वार्ता की जा रही है।
डॉ. जेएस चुफाल, सीएमओ, पिथौरागढ़