कंक्रीट का जंगल बनता जा रहा है पिथौरागढ़ शहर।
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पिथौरागढ़। एक लाख की आबादी वाला पिथौरागढ़ शहर अनियोजित विकास की भेंट चढ़ गया। तेजी से फैलते जा रहे शहर में जरूरी सुविधाओं का घोर अभाव है। शहर के आधे हिस्से में सीवर लाइन की सुविधा नहीं है। उचित संपर्क मार्ग और निकास नालियों के न होने से नगरवासियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
शहर का तेजी से विस्तार होता जा रहा है। पिछले एक दशक में शहर जाजरदेवल-वड्डा और सुकौली तक जुड़ चुका है। जिस रफ्तार से शहर का विस्तार हो रहा है उस हिसाब से नागरिकों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 20 वार्डों वाले पिथौरागढ़ शहर के आधे हिस्से में अभी सीवर की सुविधा नहीं है। हालात यह हैं कि बाजार में सीवर खुली नालियों में बहता रहता है। दौला वार्ड सहित नगरपालिका में शामिल नए वार्डों में रास्ते, नाली निकासी, स्ट्रीट लाइट की सुविधा नहीं मिल पाई है। नाली निकासी की व्यवस्था न होने से बारिश होने पर जलभराव हो जाता है। यह पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। बाजार क्षेत्र की नालियों में पानी के पाइपों का जाल बिछा है। जगदंबा कॉलोनी, कृष्णापुरी, सेरा सहित बाजार में भी कई हिस्से ऐसे हैं जहां राहगीरों के लिए केवल डेढ़-दो फीट चौड़ी संकरी गलियां हैं। लोग उचित मार्ग न होने से दोपहिया वाहन तक नहीं रख पाते हैं। वाहन स्वामियों को अपने वाहन सड़क सड़क किनारे ही छोड़ने पड़ते हैं। शहर के कई लोग धारों से पानी ढोने को मजबूर हैं। जनमंच के संयोजक भगवान सिंह रावत का कहना है कि यह समस्या अनियोजित विकास का नतीजा है, जबकि शहर में बनने वाले घरों तक रास्ता, पानी, रात्रि प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। आरटीआई कार्यकर्ता सुबोध बिष्ट का कहना है कि गृह कर और तहबाजारी वसूलने में व्यस्त नगर पालिका नागरिकों को जरूरी सुविधाएं भी नहीं दिला सकी है।
पालिकाध्यक्ष राजेंद्र सिंह रावत का कहना है कि हर वार्ड में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। लोगों को उचित संपर्क मार्ग, पानी और रात्रि प्रकाश के लिए स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। नए वार्डों में भी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। शेष हिस्से में शीघ्र ही सीवर लाइन बिछाई जानी है।