थल से बेड़ीनाग तहसील के दर्जनों गांवों को जोड़ने के लिए गोरघटिया नदी पर अंग्रेजों के शासनकाल में बने पैदल पुल की अब कोई देखरेख नहीं होती। पुल पर लगे टिन अब सड़ चुकी हैं। कई वर्षों से पुल पर पेंट नहीं किया गया है। आज भी लोग इस पुल से आवाजाही करते हैं। पुल में जगह जगह छेद हो गए हैं। उनको लोगों ने पत्थरों और लकड़ी की मदद से पाट रखा है।
सैकड़ों की संख्या में लोग इस पुल से आवाजाही करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आजादी के बाद पुल की देखरेख का काम लोनिवि को सौंपा गया था, लेकिन लोनिवि ने कभी भी पुल की ओर देखा तक नहीं।
इस पुल से लिकतड़, बलतड़ी, माछीखेत, गड़तिर, भनौला, चौपाता, ताराथल, गंगोरा, कोटीला, डांगीगांव, पुरानाथल, नाचनी, हरड़ी, बड़ेत, बरसायत, जाजर, उपराड़ा, बेलकोट आदि गांवों के लोग थल बाजार आने के लिए इसी पुल का उपयोग करते हैं। पिछले चार पांच साल से पुल की हालत और जर्जर होने लगी है। लोगों ने बताया कि लोनिवि ने जब से इस पुल को अपने अधीन लिया तब से कभी भी मरम्मत नहीं की।
लोनिवि के सहायक अभियंता दीप चंद्र पांडे ने कहा कि जल्दी ही पुल का सर्वे किया जाएगा और उसमें मरम्मत की जो भी जरूरत होगी, उसे किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पैदल पुलों की सुरक्षा के प्रस्ताव बनाकर शासन के भेजे गए हैं। शासन से धन मिलते ही गोरघटिया पुल के साथ साथ अन्य पैदल पुलों की भी मरम्मत की जाएगी।