लोनिवि का जेसीबी चालक जमन सिंह
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किसी भी क्षेत्र में लगन और मेहनत से काम किया जाए तो उसका लाभ उस संस्थान के साथ ही और लोगों को भी मिलता है। लगन, मेहनत के साथ ही जान की परवाह न करते हुए अपने काम को अंजाम देने वाले लोनिवि के डोजर ऑपरेटर जमन सिंह लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। कर्तव्यपरायणता के लिए कई बार सम्मानित हो चुके जमन सिंह पर विभाग मेहरबान नहीं है। स्थायीकरण के लिए भी उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
लोनिवि के डोजर ऑपरेटर जमन सिंह (जमन दा) इन दिनों थल-मुनस्यारी सड़क के रातीगाड़ में लोगों के खेवनहार बने हुए हैं। इस जगह पर डेढ़ किमी हिस्से पर पहाड़ी दरक गई है। पहाड़ी से जबरदस्त भूस्खलन हो रहा है। इस कारण 10 दिन पहले सड़क का करीब 50 मीटर हिस्सा रामगंगा नदी में समा गया था। पहाड़ी से लगातार गिर रहे मलबे के बीच पहाड़ी को काटकर सड़क बनाई गई। इसमें जमन दा का अहम योगदान था। रातीगाड़ में लगातार मलबा गिर रहा है, यातायात बाधित हो रहा है। बावजूद इसके जमन सिंह रातीगाड़ में बेहद जोखिम में काम कर रहे हैं। सड़क पर मलबा गिरते ही उसे साफ करने में जुट जाते हैं। पिछले साल भी नाचनी के नई बस्ती और हरड़िया नाले पर यातायात संचालन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।
वर्ष 2004 में भारी हिमपात के कारण मुनस्यारी सड़क लंबे समय तक बंद रही थी, उस समय भी जमन सिंह ने जान की परवाह किए बिना सड़क से बर्फ हटाई। इस काम के लिए उन्हें मुनस्यारी के एसडीएम ने सम्मानित किया। वर्ष 2016 में तत्कालीन जिलाधिकारी एचसी सेमवाल ने उन्हें सम्मानित किया। अपने बेहतरीन कार्य के लिए जाने जाने वाले जमन सिंह की काबिलियत उनके नियोक्ता विभाग को नहीं दिखाई देती। पहाड़पानी (भवाली-नैनीताल) निवासी जमन सिंह वर्ष 1985 में लोक निर्माण विभाग वर्कचार्ज में डोजर ऑपरेटर के पद पर नियुक्त हुए। उनके साथ नियुक्त हुए लोगों को विभाग ने वर्ष 1999 में स्थायी कर दिया, लेकिन जमन सिंह को स्थायी नहीं किया गया।
स्थायीकरण के लिए जमन सिंह को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, तब जाकर वर्ष 2012 में उन्हें स्थायी किया गया। जमन सिंह कहते हैं कि उनके साथ विभाग में नौकरी में लगे लोगों को वर्ष 1999 में स्थायी कर दिया गया, उनको भी वर्ष 1999 से नियमित माना जाना चाहिए। काम को देखा जाए तो जमन सिंह निश्चित रूप से पुरस्कार के हकदार हैं।
जमन सिंह को लोगों ने सड़कों का 108 नाम दिया
जमन सिंह की कर्तव्यनिष्ठा ही कहेंगे कि उन्हें लोगों ने सड़कों का 108 नाम दे दिया है। वह जिस तरह से बंद सड़कों को खोलने में जुटते हैं और खोलते हैं, लोग इसे 108 आपातकालीन सेवा से कम नहीं मानते। मलबे में फंसे कई वाहनों को वह निकाल चुके हैं। लोगों की मदद के लिए तत्पर रहने वाले जमन दा को लोग इसलिए 108 कहते हैं।