पिथौरागढ़-घाट एनएच में पांचवें दिन वाहनों का संचालन सुचारु हुआ।
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पिथौरागढ़। मलबा आने से बंद पिथौरागढ़-घाट नेशनल हाईवे पांचवें दिन खुल गया। हाईवे पर करीब 12.30 बजे वाहनों का संचालन शुरू हुआ। सड़क खुलने के बाद पिछले चार दिन से घाट में फंसे वाहन पिथौरागढ़ पहुंचे। जिले की लाइफ लाइन खुलने से सीमांत के लोगों ने राहत की सांस ली है।
मंगलवार रात पिथौरागढ़-घाट एनएच पर दिल्ली बैंड के पास पहाड़ी टूट गई थी। पहाड़ी से भारी मात्रा में बोल्डर गिरने से बुधवार की सुबह से वाहनों की आवाजाही ठप रही। बुधवार शाम को कुछ समय के लिए एनएच खोला गया था लेकिन रात में ही दिल्ली बैंड के साथ ही दो अन्य स्थानों पर पहाड़ी के दरकने के कारण बृहस्पतिवार को फिर यातायात बंद हो गया था। शुक्रवार और शनिवार को एनएच की मशीनें मलबा हटाने में जुटीं रहीं।
शनिवार शाम को सड़क पर आए बोल्डरों को हटा दिया गया। जैसे ही मलबा हटाया गया शाम छह बजे फिर पहाड़ी से बोल्डर सड़क पर गिर गए थे। इससे सड़क पर वाहनों की आवाजाही चौथे दिन भी शुरू नहीं हो सकी थी। रविवार को सुबह से ही मलबा हटाने का काम शुरू किया। दिन में साढ़े 12 बजे मलबा हटते ही वाहनों का संचालन शुरू हुआ। एनएच के लोहाघाट डिविजन के ईई एलडी मथेला ने बताया कि दिल्ली बैंड में आया मलबा हटा दिया गया है। पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने से काम में व्यवधान आया। अब यातायात सुचारु हो गया है।
ईंधन और रसोई गैस की आपूर्ति सुचारु होने की उम्मीद
पिथौरागढ़। पांच दिनों से हाईवे बंद होने से राशन, सब्जी सहित अन्य सामान ला रहे दर्जनों ट्रकों के साथ ही डीजल और पेट्रोल के टैंकर मार्ग में फंस गए थे। इसके चलते पिथौरागढ़ के अधिकांश पंपों में पेट्रोल डीजल समाप्त होने से शनिवार को ईंधन का संकट पैदा हो गया था। रसाई गैस भी वितरित नहीं हो पाई थी। वाहनों के थल रूट से पिथौरागढ़ आने के कारण सब्जियों के दामों में भी बढ़ोत्तरी हो गई थी। रविवार को सड़क खुलने के बाद मार्ग पर फंसे ट्रक और टैंकर भी पिथौरागढ़ पहुंचे। सोमवार से डीजल-पेट्रोल के साथ ही सिलिंडरों की आपूर्ति सुचारु होने की उम्मीद है।
एनएच बंद होने से समय के साथ धन की भी बर्बादी
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ घाट नेशनल हाईवे पिथौरागढ़ जिले की लाइफ लाइन कही जाती है। ऑलवेदर सड़क का निर्माण होने से कटिंग के बाद कई स्थानों पर पहाड़ी लगातार दरक रही है। दिल्ली बैंड में पहाड़ी टूटने के साथ ही सड़क भी ध्वस्त हो चुकी है। सड़क बंद होने से इस रूट से यात्रा करने वाले यात्रियों को पैदल आवागमन करना पड़ा वहीं अधिकांश लोगों को थल-बेड़ीनाग-सेराघाट होते हुए यात्रा करनी पड़ी। 100 किलोमीटर के अतिरिक्त घुमाव के कारण यात्रियों की जेबों पर न केवल अतिरिक्त भार पड़ा बल्कि समय भी बर्बाद हुआ।