पिथौरागढ़। जिले में मातृ व शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवतियों की निगरानी के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है। इसके तहत अब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता और एएनएम घर-घर जाकर गर्भवतियों की नियमित निगरानी करेंगी। इससे समय रहते स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की पहचान कर उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी एसएस नबियाल ने बताया कि सभी गर्भवतियों का क्षेत्रवार चिह्नांकन कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति का नियमित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दिन गर्भवती महिलाओं से फोन से या मिलकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति का पता कर शत प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जा रहा है। एसओपी में यह भी निर्देश है कि यदि किसी गर्भवती में उच्च जोखिम के लक्षण दिखते हैं तो उसे हेली सेवा से रेस्क्यू कर तत्काल उच्च स्वास्थ्य केंद्र में रेफर किया जाएगा। ब्लॉक से जिला स्तर तक अधिकारियों की निगरानी सुनिश्चित की गई है। स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित भ्रमण करना अनिवार्य होगा और लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। गर्भवती महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना का पूरा लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। संवाद