भारत-नेपाल सीमा पर झूलाघाट में स्टेट बैंक की शाखा
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भारत-नेपाल की सीमा पर बसे झूलाघाट कस्बे में नेपाल से आने वाले लोगों को बैंक से न ही पूरा पैसा मिल पा रहा है और न ही उनके पुराने नोट एक्सचेंज हो पा रहे हैं। इनमें ज्यादातर सेना के पेंशनर हैं। उनको भारत सरकार का यह फैसला उचित नहीं लग रहा है।
सीमा पर बसे झूलाघाट कस्बे में सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक और ग्रामीण बैंक की शाखाएं हैं। दोनों बैंकों में नेपाल के पेंशनरों और भारत में काम कर चुके लोगों सहित करीब 1150 खाते हैं। आठ नवंबर को सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद करने से ठीक पहले अधिकांश नेपाली खाताधारक अपनी पेंशन और पैसा निकाल चुके थे। अब घरों में रखे 500 और 1000 के नोट बदलने में उनके पसीने छूट रहे हैं। स्टेट बैंक के सहायक शाखा प्रबंधक अजेंद्र कुमार ने बताया कि बैंक में पैसा नहीं आ रहा है। पुराने नोट के बदले 2500 रुपए और चेक से 2000 रुपए दिए जा रहे हैं।
इस समय नेपाल के किसी भी व्यक्ति का नया खाता नहीं खोला जा रहा है। भारतीय सेना में कार्यरत व्यक्ति या पेंशनर का खाता ही खोला गया है। इसी तरह ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद भट्ट ने बताया कि बैंक के पास जो पैसा था वह 9 नवंबर को समाप्त हो गया था। नई करेंसी अब तक नहीं आ पाई है। बाजार से जो पैसा आ रहा है वही थोड़ा-थोड़ा खाताधारकों को बांटा जा रहा है। अब तक नेपाल के 15 लोगों ने 500 और 1000 के नोट जमा करवा रखे हैं। ग्रामीण बैंक में नेपाल के लोगों के करीब 150 खाते हैं। अभी नया खाता नहीं खोला जा रहा है। बैतड़ी जिले के लोड़ासो गांव निवासी रिटायर्ड हवलदार गणेश दत्त जोशी ने बताया कि उन्हें 12000 रुपए पेंशन मिलती है, लेकिन 25 किलोमीटर दूर से आने के बाद उन्हें मात्र 4000 रुपए ही मिले हैं। इसमें से 2000 रुपए का सामान उन्होंने झूलाघाट बाजार में खर्च कर दिया है। बाकी 2000 से वे अपने घर का खर्चा चलाएंगे।