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पिथौरागढ़ में आपदा ने 527 लोगों को किया

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बंगापानी तहसील के तल्ला मौरी गांव में आपदा के बाद अब केवल तबाही के निशान शेष रह गए हैं। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले के मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला में आई आपदा ने 527 लोगों को बेघर कर दिया है। ये लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर है। इन राहत शिविरों में न तो बिजली है और न ही पानी का कोई इंतजाम हैं।
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सीमांत जिलेे के मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला तहसील में आई आपदा ने जमकर कहर बरपाया। इस बार विभिन्न स्थानों में आई आपदा में 17 लोगों की मौत हो गई थी। टांगा गांव में तीन मकान जमींदोज हो गए थे। इसमें 11 लोग लापता हो गए थे। दस लोगों के शव बरामद कर लिए गए लेकिन एक महिला का शव मलबे से नहीं निकल सका है। धामीगांव में दो लोग जिंदा दफन हो गए थे। इसके बाद 27 जुलाई को आई भीषण आपदा में जाराजिबली और मेतली में दो महिलाएं मलबे में दब गई थीं। जारा जिबली में मलबे में दबी महिला का अभी तक सुराग नहीं लग पाया है।
तेजम के ग्राम गूंठी में एक महिला मलबे में दब गई थी। जिसका शव बरामद कर लिया गया था। मदकोट में एक मकान ध्वस्त हो गया था। शिलिंग मुनस्यारी में आपदा से 20 से मकानों को खतरा पैदा हो गया था। जोशा और धापा गांवों के लोग भी बेघर होकर प्लास्टिक के टेंटों में रह रहे हैं। इस आपदा में बच्चे, बूढ़े और महिला और युवा रहने को मजबूर हैं। कई आपदा राहत शिविरों में लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आपदा राहत शिविरों में बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं होने से लोग परेशान हैं।
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