डीडीहाट (पिथौरागढ़)। रामलीला मैदान में आयोजित नंदा महोत्सव में आस्था के साथ कलाकारों ने लोक संस्कृति के रंग बिखरे। इस दौरान कलाकारों ने झोड़ा-चांचरी गायन से लोक संस्कृति की झलक दिखाई वहीं लोक गायक राकेश खनवाल ने क्रीम पाउडर घिसनी किले नै, मेरी सुआ हंसिनी किले नै... आदि गीतों पर दर्शकों को झूमने और थिरकने के लिए विवश कर दिया।
महोत्सव के पांचवें दिन कार्यक्रमों का शुभारंभ जिला पंचायत सदस्य कमला चुफाल ने दीप जलाकर किया। महोत्सव में लोक गीत, झोड़ा-चांचरी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दर्शकों ने जमकर लुत्फ उठाया। महोत्सव की चौथी शाम कुमाऊंनी लोक गायक राकेश खनवाल और दीपिका राज के नाम रही। दोनों ने ही कुमाऊंनी गीतों की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।
इसके बाद डाइट की टीम की शिव-भस्मासुर नृत्य नाटिका का मंचन कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। महोत्सव का मुख्य आकर्षण देवीधूरा की बग्वाल रही। महोत्सव में पहली बार देवीधूरा की ऐतिहासिक बग्वाल का प्रदर्शन किया गया।
चार खामों के रणबांकुरों ने बग्वाल खेलकर हमारी धार्मिक परंपरा को जीवंत किया। पत्थर वर्षा की इस परंपरा को देखने के लिए लोगों में भारी उत्साह नजर आया। मां नंदा और मां बाराही के जयकारों के साथ बग्वाल शुरू हुई। जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। हालांकि मैदान में फूलों और फलों से बग्वाल खेली गई।
ग्राम सभाओं ने दी झोड़ा-चांचरी की प्रस्तुति
पांचवें दिन की शुरुआत लोकगीतों से हुई। बसंती कबूतर तिलुवा मैनेजर, कसि के रौली दानपुरा, गोविंदी नखारा करछी, दिगतड़ हुड़क बाजो, हिमुली हलदार की चेली हिमुली जैसे पारंपरिक झोड़ों पर विभिन्न ग्राम सभाओं के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। विद्या सागर इंटर कॉलेज, मलयनाथ इंटर कॉलेज, जीआईसी, मिर्थी ग्राम, जीआईसी वार्ड, बांकू ग्राम, बलतीर ग्राम की टीमों ने मनमोहक झोड़ा-चांचरी प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। वहीं मलयनाथ इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं की हिरन-चीतल की प्रस्तुति देकर महोत्सव में चार चांद लगाए। दर्शकों ने विद्यार्थियों की इस कलाकारी को जमकर सराहा।