नाचनी (पिथौरागढ़)। नाचनी बाजार के रामगंगा और भुजगड़ नदी के संगम स्थित मंदिर समूह सहित बड़ी आबादी नदियों से हो रहे कटाव के चलते खतरे की जद में है। प्रभावितों ने नदियों के कटाव को रोकने के लिए गुहार लगाई। बावजूद इसके पांच माह बाद भी सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं करने से लोगों में रोष है।
जुलाई में दोनों नदियों के उफान पर आने से भगवान शिव, माता संतोषी, राधा-कृष्ण, भैरव, शनि मंदिर, राम दरबार के अलावा सरस्वती शिशु मंदिर, आयुर्वेदिक अस्पताल और 15 परिवारों के आवास खतरे में आ गए। देवी मंदिर का आंगन बह गया था और मंदिर परिसर में दरारें आ चुकी हैं।
संगम तक जाने वाला रास्ता भी बह गया। इससे शवदाह में भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तल्ला जोहार संघर्ष समिति के अध्यक्ष जयराज कोरंगा ने कहा कि अगर मानसून काल से पूर्व दोनों नदियों के किनारे सुरक्षात्मक निर्माण कार्य नहीं हुए तो तबाही को रोक पाना मुश्किल होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं किए गए तो जिला कार्यालय पर आंदोलन किया जाएगा।
सिंचाई विभाग के अवर अभियंता, एसएस बिष्ट का कहना है कि शिव मंदिर समूह के अलावा शिव मंदिर वार्ड की आबादी की सुरक्षा के लिए दोनों नदियों पर सुरक्षा कार्यों का आपदा मद में प्रस्ताव भेजा है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू किया जाएगा।