कैलास मानसरोवर यात्रियों को इस बार 3350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित छियालेख से नाभीढांग तक 34 किलोमीटर का सफर वाहनों से कराया जाएगा। इसके लिए आईटीबीपी और कुमाऊं मंडल विकास निगम ने तैयारी शुरू कर दी है। आईटीबीपी ने गुंजी में पहले से ही तीन जीप पहुंचा दी है। केएमवीएन ने यात्रियों को ले जाने के लिए चार महेंद्रा जीप खरीदी हैं, इनको हेलीकॉप्टर से गुंजी पहुंचाया जाएगा।
कैलास यात्रियों को दिल्ली से नारायणआश्रम तक वाहनों से ले जाया जाता है। नारायणआश्रम से लेकर छियालेख तक अभी सड़क नहीं बनी है। इस कारण यात्रियों को 35 किलोमीटर का यह सफर पैदल तय करना होगा। इसके बाद 34 किलोमीटर वाहन से चलकर नाभीढांग पहुंचेंगे। नाभीढांग से लिपुलेख दर्रे तक 12 किलोमीटर में अभी सड़क नहीं बनी है, जिसमें उन्हें फिर पैदल चलना होगा। इसे मिलाकर कुल 47 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना होगा।
आईटीबीपी के सेनानी केदार सिंह रावत ने बताया कि यदि केएमवीएन यात्रा शुरू होने तक अपने वाहन नहीं पहुंचा पाता तो वह अपने वाहनों से यात्रियों को छियालेख से आगे ले जाने का काम करेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि कालापानी और नाभीढांग के बीच में एक मोटर पुल का निर्माण यात्रा शुरू होने से पहले पूरा कर लिया जाएगा, जबकि छियालेख से आगे नाभीढांग तक सड़क बन चुकी है। उन्होंने कहा कि इस बार कैलास यात्रियों को सफर में ज्यादा आसानी होगी।
मेडिकल के लिए गुंजी में रुकेंगे
कैलास यात्रियों का गुंजी में ही मेडिकल परीक्षण होगा। इसके लिए यात्री एक दिन जरूर गुंजी में रुकेंगे। आईटीबीपी के सेनानी केदार सिंह रावत ने बताया कि मेडिकल परीक्षण के लिए डॉक्टरों की टीम गुंजी भेजी जाएगी। इसके अलावा हाईअल्टीट्यूट में यात्रियों के स्वास्थ्य के परीक्षण के लिए भी डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी।