शहरों में तो पेयजल की किल्लत है ही अब कस्बों में भी जल संस्थान को टैंकरों से पानी बांटना पड़ रहा है। मुवानी कस्बे की पांच हजार आबादी का गला तर करने के लिए तीसरे दिन टैंकर पहुंच रहा है।
मुवानी में जीआईसी के पास एक प्राकृतिक जलस्रोत है, लेकिन गर्मियों में उसमें भी पानी कम हो गया है। आसपास के सभी नाले सूख गए हैं। कस्बे में पानी को लेकर गंभीर हाहाकार की स्थिति है।
मुवानी कस्बे के लिए मारकुना से पेयजल योजना बनी है। इस बार इस योजना में पानी का स्तर बहुत कम हो गया है। इस समय योजना से पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। टंकियां सूखी पड़ी हैं। प्राकृतिक स्रोत से पानी लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
पिछले एक महीने से चला आ रहा संकट जब अपने चरम पर पहुंचा तो जल संस्थान ने टैंकर से पानी वितरण का फैसला लिया। अब लोग तीसरे दिन टैंकर आने तक पानी को बचाकर रख रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या जानवरों को पानी पिलाने की आ रही है।
गधेरों और नालों का पानी सूख जाने से लोग गंभीर संकट में हैं। मुवानी निवासी कमलदीप बिष्ट, बसंत चौंसाली, रमेश बम का कहना है कि संकट से उबरने के लिए स्थायी समाधान होना चाहिए।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरके वर्मा का कहना है कि पेयजल योजना की मरम्मत का प्रस्ताव 2016 की जिला योजना में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योजना को ऐसे स्थान से तैयार किया जाएगा जहां पर गर्मियों में पानी कम न हो।