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संगीत, कठपुतली और मुखौटों से होगी पढ़ाई

Fri, 30 Dec 2016 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
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डीडीहाट डायट में मुखौटों के माध्यम से पढ़ाने के तरीके सीखते शिक्षक - फोटो : अमर उजाला
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कठिन विषयों और किताबों में कठिन अध्यायों को देखकर तौबा करने वाले स्कूली बच्चों के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) ने बेहद सरल और तनाव मुक्त तरीके से शिक्षा देने का पाठ्यक्रम तैयार किया है। इस पाठ्यक्रम में लोकल संगीत, बोल, मुखौटा और कठपुतली डांस को शामिल किया जाएगा। 
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उत्तराखंड की 13 डायट में से डीडीहाट डायट द्वारा तैयार किए गए इस पाठ्यक्रम को एनसीईआरटी ने मंजूरी दे दी है। इसे अगले सत्र से विद्यालयों में लागू किया जाएगा। पाठ्यक्रम को तैयार करने वाले डॉ. सीबी जोशी ने बताया कि अधिकतर बच्चे अंग्रेजी, गणित, संस्कृत जैसे कठिन विषयों से भागते हैं। इस पाठ्यक्रम में कठिन विषयों के कई अध्यायों को कुमाऊंनी गीत छपेली, संगीत, चांचरी के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। यदि किसी कठिन विषय में स्थानीय लोकगीत को शामिल कर दिया जाए तो उसे बच्चे आसानी से ग्रहण कर लेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ विषयों को कठपुतली और मुखौटों के माध्यम से भी समझाने का प्रयास किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि अंग्रेजी या संस्कृत में कोई पाठ प्राचीन कथा पर आधारित होगा तो उसमें मुखौटा या कठपुतली का प्रयोग किया जाएगा। इससे एक तरफ बच्चों का मनोरंजन होगा और वे कठिन विषय को आसानी से समझ भी लेंगे।

उन्होंने बताया कि नवाचारी प्रशिक्षण में सभी विकासखंडों के शिक्षकों को इस विधि से पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर राजेंद्र जोशी ने बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्लास को तनाव मुक्त और रुचिकर बनाना है। इस कार्यक्रम के डीडीहाट में सफल होने पर उत्तराखंड के अन्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में भी शुरू किया जाएगा।
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