मुनस्यारी-जौलजीबी मार्ग पर शनिवार की रात 10 बजे घिंघरानी के पास मलबा गिरने से पूरे 12 घंटे तक वाहनों की आवाजाही बंद रही। मुनस्यारी-जौलजीबी मार्ग पर रोज आवाजाही बंद हो रही है। घिंघरानी के पास बने नए डेंजर जोन को सीमा सड़क संगठन ठीक नहीं कर पा रहा है। सड़क को खोलने के लिए बीआरओ ने रविवार सुबह छह बजे से काम शुरू किया। दस बजे रोड खुलने पर वाहनों की आवाजाही होने लगी। घिंघरानी के पास सड़क में भारी कीचड़ पटा हुआ है। इसमें वाहनों के फंसने का डर रहता है।
मुनस्यारी से पिथौरागढ़ जाने के लिए वाहन चालक जौलजीबी वाली रोड को ही चुनते हैं। इसकी दूरी कम है लेकिन हर समय रोड ब्लाक होने से वाहन चालक और यात्री खासे परेशान हैं। उधर, थल-मुनस्यारी रोड पर वाहनों की आवाजाही जारी रही। बनिक के पास हालांकि मलबा गिरने का खतरा बना है लेकिन वाहन जैसे तैसे निकल रहे हैं। सातशिलिंग-थल रोड पर भौड़ी और बुंगाछीना के पास खतरा बना हुआ है। दोनों स्थानों पर पिछले दिनों गिरे मलबे को अब तक नहीं हटाया जा सका है। डीएम एचसी सेमवाल ने लोनिवि, बीआरओ और पीएमजीएसवाई के अधिकारियों से कहा है कि सड़क यातायात बहाल रखने के लिए लगातार प्रयास किए जाएं। हर संवेदनशील स्थान पर जेसीबी तैनात की जाए।
कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग अभी बंद
कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग अभी बंद हैं। तवाघाट से गर्वाधार जाने वाली सड़क पांगला पुल पर भारी मलबा गिरने के कारण पिछले कई दिनों से बंद है। जबकि तवाघाट से नारायणआश्रम जाने वाली रोड खेत के पास बंद है। इस समय यात्री दलों को धारचूला से पांगला तक वाहन से ले जाया जाता है। वहां से यात्री पैदल सिर्खा पड़ाव जाते हैं। कैलास मानसरोवर यात्रियों के पिछले कई दलों को इसी रास्ते से भेजा गया। कैलास मानसरोवर की यात्रा पर अब दो दल और जाएंगे। अब तक 16 दल कैलास मानसरोवर की यात्रा पर जा चुके हैं और 11 दल यात्रा पूरी कर लौट गए हैं।